कॉकरोच जनता पार्टी ने विरोध प्रदर्शन खत्म होने के बाद फिर एक बार छात्रों के लिए आवाज़ उठाई है. प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया है कि दिल्ली समेत बीजेपी शासित राज्यों में पुलिस छात्रों को डरा-धमका रही है. सौरव दास ने कहा कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ जितेंद्र सिंह ने सीजेपी को ये भरोसा दिया था कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर FIR दर्ज नहीं होगी और जो हो चुकी हैं उनके खिलाफ कोई कानूनी एक्शन नहीं लिया जाएगा. सौरव दास ने कहा कि केंद्र सरकार ने कहा कि वो सभी बातें लिखित में देगी, CJP उसका इंतज़ार कर रही है. उन्होंने कहा- ''अगर कल तक लिखित एग्रीमेंट नहीं आता है और देशभर में गिरफ्तार छात्रों को छोड़ा नहीं जाता, तो CJP अपना धरना फिर से शुरू करने पर मजबूर हो जाएगी.''
सौरव दास ने और क्या कहा?
सीजेपी प्रवक्ता ने आगे कहा- ''हमें कई राज्यों से ये खबरें मिल रही हैं कि छात्रों को हिरासत में लिया जा रहा है और भारी संख्या में FIR दर्ज हो रही हैं. हमें जानकारी मिली है कि अकेले बिहार में 500 बच्चों पर कड़ी धाराओं के तहत FIR फाइल की है. सीजेपी ने ये भी शर्त रखी थी कि सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि जहां भी बीजेपी या उसके सहयोगियों की सरकार है, वहां छात्रों पर कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए. सौरव दास ने कहा- ''हम एक वेबसाइट बनाएंगे ताकि हम लोगों तक पहुंच सकें. हम RAF और दिल्ली पुलिस के खिलाफ FIR करेंगे, जिन छात्रों के साथ बर्बरता हुई उनसे कहेंगे कि वो वीडियो अपलोड करें.''
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क्या बोले कपिल सिब्बल?
सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कहा- हमने तय किया है, जहां इनके खिलाफ मामले होंगे वहां इनको लीगल हेल्प दूंगा. हम सबको ये तय करना है कि इनको टारगेट ना किया जाए. मैं अपनी ओर से 1 करोड़ रुपये दूंगा ताकि कानूनी लड़ाई लड़ी जा सकी, दूसरों से भी कहूंगा कि वो मदद करें. वहीं सूत्रों के मुताबिक, ये खबरें आ रही हैं कि केंद्र सरकार प्रदर्शनकारियों पर कार्यवाही को लेकर सीजेपी की शिकायत पर संज्ञान ले रही है. जिन राज्यों में प्रदर्शनकारियों पर कार्यवाही हो रही है, उसके बारे में सरकार जानकारी ले रही है. सूत्रों का कहना है कि शांतिपूर्वक प्रदर्शनकारियों पर एक्शन नहीं लिया जाएगा.
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साइबर एक्शन पर बोले सौरव दास
छात्रों ने प्रधानमंत्री को लेकर जो अभद्र टिप्पणियां की, उन्हें दिल्ली पुलिस सोशल मीडिया से हटाने में लगी है. इसपर सौरव दास ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा- ''आपके लिए जो ऑफेंसिव है, शायद हमारे लिए ऑफेंसिव नहीं है. इसी तरह जो हमारे लिए ऑफेंसिव है, हो सकता है आपके लिए ना हो.'' उन्होंने कहा- ''दिल्ली पुलिस इसे हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है. पीएम मोदी भगवान तो नहीं हैं, अगर किसी ने मज़ाक में कुछ कह भी दिया तो क्या हुआ. ये लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन फिर भी दिल्ली पुलिस ऐसे बयानों को हटाने में लगी है.
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क्या है अपडेट?
जानकारी के मुताबिक, जंतर मंतर हिंसा मामले में अभी तक सरकार की ओर से केस वापस लेने का कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है. आदेश जारी होने के बाद ही कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी. जंतर मंतर हिंसा और उससे जुड़े घटनाक्रम में अब तक करीब 20 मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें 14 केस प्रदर्शन और हिंसा, एक केस बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने और कई बाकी मामले पुलिसकर्मियों और पत्रकारों के साथ कथित मारपीट से जुड़े हैं. सरकार से अनुमति मिलने के बाद अभियोजन पक्ष (दिल्ली पुलिस) मामलों को वापस लेने की सिफारिश करते हुए उपराज्यपाल (एलजी) को पत्र भेजेगा. पत्र में कहा जाएगा कि इन मामलों में आगे अभियोजन नहीं चलाया जाना है. एलजी की मंजूरी मिलने के बाद दिल्ली पुलिस संबंधित अदालत को सूचित करेगी कि वो इन मामलों में आगे अभियोजन नहीं करना चाहती. इसके बाद आखिरी फैसला अदालत का होगा.
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