शराब कंपनियों को FSSAI का नोटिस, बीयर-रम और ब्रांडी को लेकर क्या बदलेगा?
Fssai Guidelines For Alcoholic Beverages: हाल ही में एफएसएसएआई ने अल्कोहलिक बेवरेज कंपनियों को लेकर नोटिस जारी किया है. इस दौरान, कुछ कंपनियों रम, ब्रांड, जिन और व्हिस्की में फ्लेवर की मिलावट को लेकर खास नियम बनाए हैं.
Edited By : Shadma Muskan|Updated: Jul 10, 2026 10:57
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बीयर-रम और ब्रांडी को लेकर क्या बदलेगा? Image Credit- Freepik
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भारत में शराब बनाने वाली कंपनियों को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में कुछ कंपनियों को कहा गया है कि वो बिना अनुमति के ज्यादा फ्लेवर का इस्तेमाल ना करें और ना ही प्रोडक्ट्स से जुड़े भ्रम को भी बढ़ावा ना दें. नियम के मुताबिक, अल्कोहलिक बेरवेज विनियम 2018 के तहत कुछ कंपनियों को रम, डी, जिन, वाइन और बीयर जैसे प्रोडक्ट्स में नेचुरल स्वाद लाने के लिए फ्लेवर इस्तेमाल करने को मना किया है. FSSAI ने स्पष्ट किया है कि ऐसे भ्रामक दावे खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुरूप नहीं हैं. इसको लेकर और क्या नियम हैं, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं.
FSSAI के अनुसार, कुछ शराब कंपनियां अपने उत्पादों के प्रचार में ऐसे शब्दों और दावों का इस्तेमाल कर रही थीं, जिनसे लोगों यह संदेश मिल सकता है कि शराब का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है. इसलिए इस तरह के दावे भ्रामक हो सकते हैं और लोगों को गुमराह कर सकते हैं.
शराब के विज्ञापनों में स्वास्थ्य या पोषण से जुड़े दावे देखने को नहीं मिलेंगे. पैकेजिंग और प्रमोशनल सामग्री में नियमों में बदलाव किए जा सकते हैं। भ्रामक फैलाने वाले विज्ञापनों पर सख्ती की जा सकती है.
क्या उपभोक्ताओं पर कोई असर पड़ेगा?
इस नोटिस का मतलब यह नहीं है कि बीयर, रम, व्हिस्की या ब्रांडी की बिक्री पर कोई प्रतिबंध लगाया गया है. फिलहाल यह कार्रवाई मुख्य रूप से कंपनियों के विज्ञापन, लेबलिंग और प्रचार से जुड़े नियमों के पालन पर केंद्रित है.
इस फैसले का उद्देश्य क्या है?
FSSAI का उद्देश्य यह है कि किसी भी प्रोडक्ट्स को लेकर दावे न किए जाएं जब तक विज्ञापन प्रमाणित न हों. इसलिए FSSAI चाहता है कि सभी कंपनियां इस नियम का पालन करें और सच के बिहाफ पर फैसला लें.
भारत में शराब बनाने वाली कंपनियों को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में कुछ कंपनियों को कहा गया है कि वो बिना अनुमति के ज्यादा फ्लेवर का इस्तेमाल ना करें और ना ही प्रोडक्ट्स से जुड़े भ्रम को भी बढ़ावा ना दें. नियम के मुताबिक, अल्कोहलिक बेरवेज विनियम 2018 के तहत कुछ कंपनियों को रम, डी, जिन, वाइन और बीयर जैसे प्रोडक्ट्स में नेचुरल स्वाद लाने के लिए फ्लेवर इस्तेमाल करने को मना किया है. FSSAI ने स्पष्ट किया है कि ऐसे भ्रामक दावे खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुरूप नहीं हैं. इसको लेकर और क्या नियम हैं, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं.
FSSAI के अनुसार, कुछ शराब कंपनियां अपने उत्पादों के प्रचार में ऐसे शब्दों और दावों का इस्तेमाल कर रही थीं, जिनसे लोगों यह संदेश मिल सकता है कि शराब का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है. इसलिए इस तरह के दावे भ्रामक हो सकते हैं और लोगों को गुमराह कर सकते हैं.
Food Safety & Standards Authority of India (FSSAI) tweeted, "FSSAI has issued notices to alcoholic beverage manufacturers for alleged non-compliance with regulatory provisions relating to added flavours & misleading age-related claims. The FBOs have been directed submit… pic.twitter.com/TAs1eqGrWy
शराब के विज्ञापनों में स्वास्थ्य या पोषण से जुड़े दावे देखने को नहीं मिलेंगे. पैकेजिंग और प्रमोशनल सामग्री में नियमों में बदलाव किए जा सकते हैं। भ्रामक फैलाने वाले विज्ञापनों पर सख्ती की जा सकती है.
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क्या उपभोक्ताओं पर कोई असर पड़ेगा?
इस नोटिस का मतलब यह नहीं है कि बीयर, रम, व्हिस्की या ब्रांडी की बिक्री पर कोई प्रतिबंध लगाया गया है. फिलहाल यह कार्रवाई मुख्य रूप से कंपनियों के विज्ञापन, लेबलिंग और प्रचार से जुड़े नियमों के पालन पर केंद्रित है.
इस फैसले का उद्देश्य क्या है?
FSSAI का उद्देश्य यह है कि किसी भी प्रोडक्ट्स को लेकर दावे न किए जाएं जब तक विज्ञापन प्रमाणित न हों. इसलिए FSSAI चाहता है कि सभी कंपनियां इस नियम का पालन करें और सच के बिहाफ पर फैसला लें.