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ऑपरेशन सिंदूर के बाद DRDO की बड़ी तैयारी, हवा में बिना टकराए दुश्मन पर हमला करेंगे स्वदेशी ड्रोन

भारतीय रक्षा मंत्रालय एक अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक पर काम करने जा रहा है. यह बेहद कम दूरी तय करते हुए दुश्मन पर चौतरफा हमला कर सकेगा.

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ऑपरेशन सिंदूर के समय पाकिस्तान की तरफ से लगातार ड्रोन से हमले किया जा रहा था लेकिन भारतीय सेना ने इस हमले का जोरदार तरीके से जवाब दिया है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि हमारी सेना को भविष्य के युद्ध के लिए नई टेक्नोलॉजी के साथ तैयार होने के साथ ही सेना को अब ज्यादा से ज्यादा आर्म्स और युद्ध के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री को रखा जाना चाहिए.

अब भारतीय रक्षा मंत्रालय एक अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक पर काम करने जा रहा है. यह बेहद कम दूरी तय करते हुए दुश्मन पर चौतरफा हमला कर सकेगा. भारतीय रक्षा मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि नई टेक्नोलॉजी के साथ बनने वाला यह ड्रोन पूरी तरह से आत्मनिर्भर भारत के तहत बना होगा और इसमें देश के एमएसएमई, स्टार्टअप्स और प्राइवेट कंपनी को शामिल होने का मौका दिया जाएगा. इसके लिए डीआरडीओ ने रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी कर दिया है.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की तरफ से भेजे जा रहे ड्रोन में यह देखा गया कि ड्रोन एक साथ उड़कर हमला करने की कोशिश में थे और हवा में इन ड्रोन के बीच दूरी भी देखी गई थी, लेकिन जो अत्याधुनिक ड्रोन का निर्माण डीआरडीओ करने जा रही है. वह ऐसा बना रही है कि हवा में ड्रोन की दूरी 500 मिलीमीटर से भी कम दूरी पर रहने के साथ ही इसकी उड़ान पूरी तरह सेफ और कंट्रोल में रहेगी.

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इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए डीआरडीओ पहले चरण में 50 ड्रोन का निर्माण करवाएगा. जिसमें मास्टर ड्रोन भी शामिल रहेगा. इसकी उड़ान का डिजाइन भी तैयार कर लिया गया है. यानी अटैक के दौरान एक ड्रोन दूसरे ड्रोन की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ही बिना टकराए दूरी बनाए रखने के साथ ही पूरा कंट्रोल सिस्टम, कम्युनिकेशन नेटवर्क, ग्राउंड स्टेशन और सभी जरूरी सॉफ्टवेयर भी डेवलप शामिल किए जाएंगे.

डीआरडीओ के इस मेगा प्रोजेक्ट में सबसे अहम ड्रोन के सटीक वार करवाने की होगी. डीआरडीओ के मुताबिक हर एक ड्रोन की स्थिति में तीनों अक्षों पर अधिकतम पांच सेंटीमीटर तक की ही गलती स्वीकार होगी. यदि किसी ड्रोन की स्थिति बदलती है तो पूरा सिस्टम 500 मिलीसेकंड के भीतर उसकी स्थिति को ठीक कर देगा.

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रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल के मुताबिक, इस अत्याधुनिक ड्रोन के लिए इनकी उड़ान का समय भी तय किया गया है. यानी इसकी उड़ने की ताकत कम से कम आधे घंटे की होने के साथ ही जब इसकी चार्जिंग खत्म होने पर मात्र 15 मिनट के अंदर दोबारा फुल चार्जिंग के साथ दुश्मन पर अटैक करने के लिए तैयार हो जाए.

रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल के मुताबिक ड्रोन हल्का, बड़ी मात्रा में पेलोड ले जाने की क्षमता के साथ ही इसमें पावर सप्लाई शामिल नहीं हो और जो लोड उठाने की अभी जो ताकत है उससे 30 प्रतिशत अधिक उठाने की ताकत इसमे शामिल हो सके.

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इस नए और अत्याधुनिक ड्रोन में सबसे खास बात जैमर की होगी. क्योंकि दुश्मन की सबसे पहले कोशिश ड्रोन को जैमर के जरिए ब्लॉक कर देने की होती है. इसी को देखते हुए इस प्रोजेक्ट में जैमिंग-प्रूफ वायरलेस कम्युनिकेशन सिस्टम को लगाया जाएगा.

क्या खासियत रहेगी इस ड्रोन में

यह 5000 मीटर तक की ऊंचाई पर काम करने में सक्षम होगा. ड्रोन 20 मीटर प्रति सेकंड तक की हवा की अटैक को सहने का पॉवर रखेगा. मौका पड़ने पर सुरक्षित तरीके से घर वापसी भी कर लेगा.

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डीआरडीओ ने साफ तौर पर कहा है कि जिस कंपनी के ऊपर मुहर लगेगी उसे ड्रोन बनाने के साथ ही ग्राउंड हैंडलिंग इक्विपमेंट, ऑनबोर्ड स्पेयर्स, विशेष टूल्स, कंट्रोल स्टेशन, कम्युनिकेशन सब-सिस्टम, कंट्रोल एल्गोरिदम, ग्राफिकल यूजर इंटरफेस, सोर्स कोड, यूजर मैनुअल और मेंटेनेंस डॉक्यूमेंट पर भी काम करना पड़ेगा. यह पूरा प्रोजेक्ट लगभग 10 करोड़ रुपये का है और इसे 2 साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

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