बंगाल की अल्पसंख्यक राजनीति में एक अहम चेहरा बनकर उभरे हुमायूं कबीर ने कहा कि जब तक सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद पर रहेंगे, वो राज्य विधानसभा में नहीं जाएंगे. उन्होंने इस फैसले के लिए नाओडा की जनता से माफी भी मांगी. कबीर ने आंखों में आंसू भरकर कहा, ”अगर सुवेंदु अधिकारी सीएम बने रहते हैं, तो मैं विधानसभा नहीं जाऊंगा. मैं नाओडा की जनता से माफी मांगूंगा.” हुमायूं कबीर ने राजनीति से स्वेच्छा से संन्यास लेने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और उनके साथ किए गए व्यवहार से उनका मोहभंग हो गया है.
‘जनता के लिए काम करता रहूंगा’
हुमायूं कबीर ने कहा कि विधानसभा से दूर रहने के फैसले के बावजूद वो नाओडा की जनता के लिए काम करते रहेंगे और ये सुनिश्चित करेंगे कि निर्वाचन क्षेत्र में जन-सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहें. AJUP प्रमुख ने साफ किया कि वो विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे, जिसमें अल्पसंख्यक मामलों की समिति, सदन की समितियों, कार्य सलाहकार समिति, सर्वदलीय बैठकों या स्पीकर की बुलाई गई बैठकों की कार्यवाही शामिल है. कबीर ने कहा, ”मेरे लिए आरक्षित सीट खाली रहेगी.” उन्होंने कहा कि अपनी विधानसभा सदस्यता पूरी तरह छोड़ने का फैसला करने से पहले वो नाओडा की जनता की राय लेंगे.
12 घंटे हिरासत में रहे
हुमायूं कबीर की ये टिप्पणी रेजीनगर में हुए हाई-वोल्टेज मतदान के एक दिन बाद आई है, जहां अपनी पार्टी कार्यालय के बाहर पुलिस के साथ टकराव के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था. करीब 12 घंटे हिरासत में रहने के बाद MLA को रिहा कर दिया गया. पुलिस ने उन पर वोट डालने के बाद अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने, मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश करने और भड़काऊ टिप्पणी करने का आरोप लगाया था. कबीर ने वापस पुलिस और प्रशासन आरोप पर लगाया है. उन्होंने जोर देकर कहा, ”मैं ऐसी डेमोक्रेसी को क्यों मानूं, जहां एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर बिना किसी ठोस वजह के चुने हुए MLA को जबरदस्ती ले जा सकता है और 12 घंटे तक कस्टडी में रख सकता है. मुझे ऐसी डेमोक्रेसी से नफरत है.”