क्या चीन ने अरुणाचल प्रदेश में की घुसपैठ? भारतीय सेना ने खारिज की रिपोर्ट, बताया बेबुनियाद
नाह वेलफेयर सोसाइटी की तरफ से दावा किया गया कि चीन ने पांच स्थानों- असाफिला क्षेत्र के ओयिंग, चुजार्ता में पनिआर, मरपन (मार्नाफे), पोत्रंग झील और तिनडिंगतांग में घुसपैठ की है. ऑर्गनाइजेशन ने यह कहा कि वर्ष 2020 से पहले तक ये सभी क्षेत्र पूरी तरह से भारतीय नियंत्रण में थे.
Written By: Akarsh Shukla|Updated: Jun 29, 2026 23:45
Edited By : Akarsh Shukla|Updated: Jun 29, 2026 23:45
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भारत के अरुणाचल प्रदेश में एक बार फिर से चीनी घुसपैठ को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसके बाद से सोशल मीडिया पर इस मामले ने तूल पकड़ लिया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सीमा के भीतर घुसपैठ की है और सैन्य शिविर स्थापित किए हैं. भारतीय सेना ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए गलत और बेबुनियाद बताया गया है. सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में सेना ने इन दावों को पूरी तरह से बेबुनियाद करार दिया है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह विवाद स्थानीय मीडिया संस्थान 'अरुणाचल ऑब्जर्वर' की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ. इस रिपोर्ट में टाकसिंग क्षेत्र के एक ऑर्गनाइजेशन 'नाह वेलफेयर सोसाइटी' (NWS) द्वारा स्थानीय प्रशासन को सौंपे गए एक ज्ञापन का हवाला दिया गया था. संगठन के अध्यक्ष केरु चादर ने इस ज्ञापन में दावा किया कि चीनी सेना ने भारत-चीन सीमा के पास रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण अपर सुबनसिरी जिले के टाकसिंग सर्कल में भारतीय क्षेत्र के काफी अंदर तक अपने कैंप बना लिए हैं.
नाह वेलफेयर सोसाइटी की तरफ से दावा किया गया कि चीन ने पांच स्थानों- असाफिला क्षेत्र के ओयिंग, चुजार्ता में पनिआर, मरपन (मार्नाफे), पोत्रंग झील और तिनडिंगतांग में घुसपैठ की है. ऑर्गनाइजेशन ने यह कहा कि वर्ष 2020 से पहले तक ये सभी क्षेत्र पूरी तरह से भारतीय नियंत्रण में थे. साथ ही इनमें से कुछ जगहें त्सारी क्षेत्र में स्थित हैं, जो स्थानीय समुदायों के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से पवित्र तीर्थ स्थल माने जाते हैं.
प्रशासन को लिखे पत्र में ऑर्गनाइजेशन के चीफ ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि सीमावर्ती क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है और चीनी सेना की गतिविधियां स्थानीय आबादी के लिए बड़े संकट का संकेत हैं. उन्होंने सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की थी.
स्थानीय स्तर पर उठ रही इन आशंकाओं के बीच, भारतीय सेना ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए स्थिति स्पष्ट की है. सेना ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि सीमा पर भारतीय जवानों द्वारा कड़ी निगरानी की जा रही है और किसी भी प्रकार की घुसपैठ की रिपोर्टों में कोई सच्चाई नहीं है.
भारत के अरुणाचल प्रदेश में एक बार फिर से चीनी घुसपैठ को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसके बाद से सोशल मीडिया पर इस मामले ने तूल पकड़ लिया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सीमा के भीतर घुसपैठ की है और सैन्य शिविर स्थापित किए हैं. भारतीय सेना ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए गलत और बेबुनियाद बताया गया है. सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में सेना ने इन दावों को पूरी तरह से बेबुनियाद करार दिया है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह विवाद स्थानीय मीडिया संस्थान ‘अरुणाचल ऑब्जर्वर’ की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ. इस रिपोर्ट में टाकसिंग क्षेत्र के एक ऑर्गनाइजेशन ‘नाह वेलफेयर सोसाइटी’ (NWS) द्वारा स्थानीय प्रशासन को सौंपे गए एक ज्ञापन का हवाला दिया गया था. संगठन के अध्यक्ष केरु चादर ने इस ज्ञापन में दावा किया कि चीनी सेना ने भारत-चीन सीमा के पास रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण अपर सुबनसिरी जिले के टाकसिंग सर्कल में भारतीय क्षेत्र के काफी अंदर तक अपने कैंप बना लिए हैं.
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Indian Army- "We have seen some media reports alleging recent encroachment by Chinese PLA and setting up of camps in Arunachal Pradesh. These reports are incorrect and without any basis." pic.twitter.com/N3SSJQYL7l
नाह वेलफेयर सोसाइटी की तरफ से दावा किया गया कि चीन ने पांच स्थानों- असाफिला क्षेत्र के ओयिंग, चुजार्ता में पनिआर, मरपन (मार्नाफे), पोत्रंग झील और तिनडिंगतांग में घुसपैठ की है. ऑर्गनाइजेशन ने यह कहा कि वर्ष 2020 से पहले तक ये सभी क्षेत्र पूरी तरह से भारतीय नियंत्रण में थे. साथ ही इनमें से कुछ जगहें त्सारी क्षेत्र में स्थित हैं, जो स्थानीय समुदायों के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से पवित्र तीर्थ स्थल माने जाते हैं.
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प्रशासन को लिखे पत्र में ऑर्गनाइजेशन के चीफ ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि सीमावर्ती क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है और चीनी सेना की गतिविधियां स्थानीय आबादी के लिए बड़े संकट का संकेत हैं. उन्होंने सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की थी.
स्थानीय स्तर पर उठ रही इन आशंकाओं के बीच, भारतीय सेना ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए स्थिति स्पष्ट की है. सेना ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि सीमा पर भारतीय जवानों द्वारा कड़ी निगरानी की जा रही है और किसी भी प्रकार की घुसपैठ की रिपोर्टों में कोई सच्चाई नहीं है.