Add News24 as a Preferred Source Add news 24 as a Preferred Source

---विज्ञापन---

देश

‘GMT की जगह अब महाकाल स्टैंडर्ड टाइम’, धर्मेंद्र प्रधान की मांग पर विपक्ष ने कसा तंज

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने समय की वैश्विक गणना के लिए 'महाकाल स्टैंडर्ड टाइम' का प्रस्ताव पेश किया है. उन्होंने अंग्रेजों के तय जीएमटी की जगह उज्जैन को मानक बनाने की वकालत की, जिसको लेकर विपक्ष ने तंज कसा है.

Author
Written By: Raja Alam Updated: Apr 5, 2026 17:20

दुनिया भर में समय की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘ग्रीनविच मीन टाइम’ यानी जीएमटी को बदलकर अब ‘महाकाल स्टैंडर्ड टाइम’ करने का एक बड़ा प्रस्ताव सामने आया है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक कार्यक्रम के दौरान यह महत्वाकांक्षी विचार पेश किया है. उन्होंने कहा कि समय की गणना के लिए इंग्लैंड के एक शहर से गुजरने वाली काल्पनिक रेखा के बजाय भारत के प्राचीन शहर उज्जैन को वैश्विक मानक माना जाना चाहिए. प्रधान के मुताबिक उज्जैन सदियों से खगोल विज्ञान और समय की सटीक गणना का केंद्र रहा है, इसलिए अब दुनिया को औपनिवेशिक मानसिकता छोड़कर भारत के इस वैज्ञानिक गौरव को स्वीकार करना चाहिए.

उज्जैन का प्राचीन वैज्ञानिक महत्व

शिक्षा मंत्री ने तर्क दिया कि उज्जैन वह स्थान है जहां भूमध्य रेखा और कर्क रेखा का मिलन होता है और प्राचीन काल में दुनिया भर के समय की गणना यहीं से की जाती थी. उन्होंने कहा कि अंग्रेजों और औपनिवेशिक शासकों द्वारा थोपे गए मानकों को बदलने का समय अब आ गया है और ‘महाकाल स्टैंडर्ड टाइम’ को तार्किक रूप से स्थापित किया जाना चाहिए. उज्जैन के तारामंडल परिसर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान प्रधान ने विज्ञान केंद्र और प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया. उन्होंने जोर देकर कहा कि अगले एक दशक में भारत को ‘मैकाले की शिक्षा नीति’ और औपनिवेशिक विरासत को पूरी तरह खत्म कर एक नई वैज्ञानिक दृष्टि के साथ आगे बढ़ना होगा.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: राघव चड्ढा का नया वीडियो देखें, AAP को दिखाए आक्रामक तेवर, कहा- ये तो ट्रेलर है, पूरी पिक्चर अभी बाकी है

मुख्यमंत्री का मिला साथ

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी शिक्षा मंत्री के इस प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन किया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन ऐतिहासिक रूप से खगोल विज्ञान का वैश्विक केंद्र रहा है और हमारे पूर्वजों ने ‘सूर्य सिद्धांत’ जैसे ग्रंथों के माध्यम से समय की सबसे सटीक गणना की थी. उन्होंने दावा किया कि भारतीय समय मापन प्रणाली जो सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रहों की गति पर आधारित है, वह जीएमटी की तुलना में कहीं अधिक सटीक और वैज्ञानिक है. मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि उनकी सरकार उज्जैन को न केवल एक धार्मिक केंद्र बल्कि एक प्रमुख वैज्ञानिक केंद्र के रूप में भी विकसित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है जहां आध्यात्म और विज्ञान का संगम होगा.

---विज्ञापन---

विपक्ष ने बताया विकास का दिवालियापन

दूसरी ओर कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने शिक्षा मंत्री के प्रस्ताव का मजाक उड़ाते हुए कहा कि यह भाजपा के विकास एजेंडे के दिवालियापन को दर्शाता है. अल्वी ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा का विकास केवल सड़कों और शहरों के नाम बदलने तक सीमित है और अब वे समय का मानक भी बदलना चाहते हैं. उन्होंने तंजिया लहजे में कहा कि अगर भाजपा को आधुनिक चीजों से इतनी ही दिक्कत है तो उन्हें मोबाइल और बिजली का इस्तेमाल भी बंद कर देना चाहिए. इस मुद्दे ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है जहां एक तरफ स्वदेशी गर्व है और दूसरी तरफ इसे गैर-जरूरी बताया जा रहा है.

First published on: Apr 05, 2026 05:20 PM

संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.