CJP ने दी जंतर-मंतर जैसे आंदोलन की चेतावनी, सरकार पर लगाया भरोसा तोड़ने का आरोप

Cockroach Janta Party: कॉकरोच जनता पार्टी ने एक बार फिर जंतर-मंतर जैसे प्रदर्शन की चेतावनी दी है. सीजेपी का कहना है कि केंद्र सरकार की तरफ से किए गए 3 बड़े वादे पूरे नहीं किए गए हैं, ये देश के छात्रों के साथ ‘विश्वासघात’ है.

Saurav Das Abhijeet Dipke Ashutosh Ranka PTI

सौरव दास, अभिजीत दीपके आशुतोष रांका (Photo-PTI)

CJP Warns of Fresh Protest: कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने जंतर-मंतर पर लंबे समय तक चले विरोध प्रदर्शन को खत्म करने के लिए दिए गए वादों को पूरा नहीं किया है. रविवार, 23 अगस्त को इस ग्रुप ने सरकार से बातचीत के दौरान किए गए सभी वादों को लागू करने की अपील की और चेतावनी दी कि इसमें किसी भी तरह की देरी से एक और आंदोलन शुरू हो सकता है. एक बयान में सीजेपी ने आरोप लगाया कि सरकार ने अभी तक प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की लिस्ट शेयर नहीं की है, जबकि कोर्ट ने उन्हें वापस लेने के लिए कई बार कहा था.

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भरोसा तोड़ने का इल्जाम

कॉकरोच जनता पार्टी ने कहा कि उनकी तरफ से पहले ही चेतावनी दी थी कि वादों पर कार्रवाई न करना उन युवा भारतीयों को धोखा देने जैसा होगा जिन्होंने सरकार पर भरोसा किया था. सीजेपी ने कहा कि वादों को टालने, कमजोर करने या उनका गलत मतलब निकालने की कोई भी कोशिश भरोसे को बुरी तरह तोड़ने जैसा होगा, जिसे उसने देश के युवाओं के साथ ‘विश्वासघात’ बताया.

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24 अगस्त को अगली मीटिंग

सीजेपी ने कहा कि वो आगे की रणनीति तय करने के लिए 24 अगस्त को मीटिंग करेगी. उसने छात्रों, युवा नागरिकों, समर्थकों और वॉलंटियर्स से कहा है कि वो संभावित कदम के लिए तैयार रहें. सीजेपी के मुताबिक, सरकार के किसी भी डेलिगेशन ने वादों पर हुए प्रोग्रेस के बारे में उसके रिप्रेजेंटेटिव्स से संपर्क नहीं किया है. इन वादों में NEET की तैयारी करने वाले उन छात्रों के परिवारों को आर्थिक मदद देना भी शामिल है जिन्होंने खुदकुशी कर ली थी. ग्रुप का दावा है कि उसके महीने भर चले विरोध प्रदर्शन की वजह से पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा, लेकिन उसने कहा कि जब तक सभी वादे पूरे नहीं हो जाते, तब तक आंदोलन को पूरा नहीं माना जाएगा.

तीन बड़े वादे क्या थे?

CJP ने 25 जुलाई को अपना विरोध प्रदर्शन खत्म किया था. उसने दावा किया था कि सरकार ने 3 बड़ी मांगें मान ली हैं: पीड़ित परिवारों को ज्यादा से ज्यादा मुआवजा देना, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर वापस लेना, और सरकार के साथ आगे बातचीत के जरिए परीक्षा सुधार के अपने पांच-सूत्रीय एजेंडे पर विचार करना.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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