भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने सोमवार को अरावली पहाड़ियों और रेंज की एक जैसी परिभाषा तय करने के लिए बनाई गई हाई-पावर कमेटी की टाइम लिमिट बढ़ाने की याचिका को खारिज कर दिया. समिति ने 28 फरवरी, 2027 तक टाइम लिमिट बढ़ाने की मांग की थी. CJI ने कहा कि कमेटी इस काम को उनकी रिटायरमेंट के बाद तक खींचने की कोशिश कर रही है. अब अदालत ने उन्हें 30 नवंबर तक अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंपने का ऑर्डर दिया.

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CJI ने क्या कहा?

केंद्र की तरफ से पेश की गई एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से CJI सूर्यकांत ने कहा, ''उन्हें साफ तौर पर मेरे रिटायरमेंट के बाद की तारीख मांगनी चाहिए थी. ऐसा लगता है कि वो मेरे रिटायरमेंट का इंतजार कर रहे हैं. हम ऐसा नहीं होने देंगे.'' आपको बता दें कि 9 फरवरी 2027 को CJI सूर्यकांत रिटायर हो जाएंगे. CJI की अध्यक्षता वाली बेंच ने इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन (ICFRE) की डायरेक्टर जनरल कंचन देवी की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय कमेटी को मन लगाकर काम करने और नई टाइम लाइन फॉलो करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए ये साफ कर दिया कि आगे कोई समय नहीं बढ़ाया जाएगा.

6 महीने का मांगा था टाइम

हालांकि, कोर्ट ने ये समझा कि कमेटी का काम उतना आसान नहीं है, इसीलिए ये निर्देश दिया कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़े, वो खास मुद्दों पर अंतरिम रिपोर्ट सौंपती रहे. अदालत ने कहा कि रिपोर्ट्स के जरिए पूरी प्रक्रिया खत्म होने से पहले ही कई तरह के सवाल सुलझ जाएंगे. दरअसल, कमेटी ने कोर्ट को बताया था कि उन्हें ये पता चला है कि अरावली के इलाके को सिर्फ जमीन की बनावट या ऊंचाई के आधार पर सही से एक्सप्लेन नहीं किया जा सकता. समिति ने सुप्रीम कोर्ट से छह महीने का टाइम बढ़ाने की मांग की थी, जिसे अब रिजेक्ट कर दिया गया है.

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