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Odisha Police Officer Order Controversy: ओडिशा के पुलिस अफसर ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जवानों को ऐसा आदेश दिया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। अफसर ने जवानों से कहा कि उन्हें पकड़ो मत, बस टांगें तोड़ दो। जो टांग तोड़ेगा, वह मेरे पास आकर इनाम ले लेगा। आदेश देने वाले अफसर का नाम नरसिंह भोल है, जिसने प्रदर्शनकारियों को ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी के घर तक जाने से रोकने के लिए जवानों को टांगें तोड़ने का आदेश दिया। मुख्यमंत्री के घर के बाहर सुरक्षा में तैनात अफसर का विवादित आदेश देने का वीडियो बनाकर किसी ने सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया, जो अब खूब वायरल हो रहा है।
IS THIS DEMOCRACY?@IYCOdisha went to gherao the CM’s residence, demanding accountability for the chaos and mismanagement during the recent Puri Rath Yatra incident. But instead of answers, @odisha_police squads, acting like government goons, tried to crush the voice of youth.… pic.twitter.com/vlTSSof3hx
— Manas choudhury (@ManasCOfficial) June 29, 2025
बता दें कि पुरी में श्री गुंडिचा मंदिर के पास जगन्नाथ यात्रा के दौरान भगदड़ मच गई थी। हादसे में 3 लोगों की मौत हुई और करीब 50 लोग घायल हैं। कांग्रेस ने इसे सरकार की लापरवाही और कुप्रबंधन का नतीजा बताया। रविवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री मांझी के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया। इसलिए मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
सुरक्षा का जिम्मा भुवनेश्वर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (ACP) नरसिंह भोल को सौंपा गया था। उपद्रवी प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए गए थे। प्रदर्शनकारियों को बैरिकेड के उस पर रोकने का ही आदेश था, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस अफसर ने जवानों को एक आदेश दिया, जिसका किसी ने वीडियो बनाकर वायरल कर दिया।
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पुलिस अफसर भोल ने जवानों को बैरिकेड के पास बुलाकर अंगुली से इशारा करते हुए आदेश दिया कि अगर कोई बैरिकेड तक पहुंचता है तो उसकी टांग तोड़ दो। उन्हें पकड़ो मत, बस उनकी टांगें तोड़ दो। हम उन्हें पकड़ने के लिए वहां खड़े हैं। जो कोई टांग तोड़ेगा, वह मेरे पास आएगा और इनाम लेगा। इसके जवाब में जवानों ने कहा कि हां, सर, हां, सर।
सोशल मीडिया पर इस आदेश का वीडियो वायरल होने के बाद ACP भोल ने सफाई देते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी को गलत समझा गया है और गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। हर काम को करने का एक जगह, एक समय और एक संदर्भ होता है। आदेश कहां दिया गया था और कब दिया गया था, अगर वीडियो देखें तो जवानों से कहा गया था कि हम उन्हें गिरफ़्तार करने आए हैं।
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आदेश था कि पहले बैरिकेड पर ही अनियंत्रित प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जाए। अगर कोई प्रदर्शनकारी 2 बैरिकेड तोड़ता है और उनसे आगे चला जाता है तो वह व्यक्ति कानून तोड़ता है। पुलिस जवान गैर-कानूनी हरकत को करने से रोकने के लिए बल प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं।
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