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नए साल में विजय की तरफ BJP! दिल्ली में राष्ट्रीय अधिवेशन, बंगाल-तमिलनाडु पर सियासी निशाना

नया साल आते ही बीजेपी ने आगामी चुनावों की तैयारियां शुरू कर दीं हैं। इस साल 4 राज्यों समेत 1 केंद्र शासित राज्य में विधानसभा चुनाव होना है। इसकी चर्चा के लिए बीजेपी ने फरवरी में राष्ट्रीय अधिवेशन करने जा रही है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

Author Written By: Kumar Gaurav Updated: Jan 1, 2026 13:25

नए साल के आगाज के साथ ही बीजेपी का राजनीतिक कार्यक्रम भी तेज होने वाला है। भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन फरवरी में आयोजित किए जाने की तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार भी पार्टी का अधिवेशन दिल्ली के भारत मंडपम में करने की तैयारी है। अधिवेशन संसद के दो चरणों में होने वाले बजट सत्र के बीच मिलने वाले ब्रेक के दौरान, यानी फरवरी के मध्य में हो सकता है।

बजट सत्र के कारण सांसदों की पहले से मौजूदगी को देखते हुए पार्टी को ये वक्त अधिवेशन के लिए मुफ़ीद लग रहा है । खास बात ये भी है की 27 फरवरी को बंगाल और असम विधानसभा के चुनाव के लिए तारीखों के एलान की संभावना है इसलिए बीजेपी उससे पहले अपना ये बड़ा कार्यक्रम संपन्न कर लेना चाहती है।

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सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव अधिवेशन से पहले ही पूरा करा लेने की तैयारी है। ऐसे में मौजूदा कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका में आ जाएंगे और अधिवेशन में उनके नाम पर केवल औपचारिक अनुमोदन किया जाएगा।

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पूर्व की तरह अधिवेशन में देश के ज्वलंत मुद्दों पर प्रस्ताव पारित करने की बात कही जा रही है, लेकिन पार्टी की प्राथमिकता नीतिगत बहस से ज्यादा राजनीतिक एजेंडा तय करने पर केंद्रित दिख रही है। सूत्रों का कहना है कि अधिवेशन के जरिए पार्टी विपक्ष शासित राज्यों के खिलाफ अपना नैरेटिव और तेज कर सकती है।

चुनावी राज्यों पर खास फोकस

राष्ट्रीय अधिवेशन में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु,केरल जैसे राज्यों के लिए विशेष संकल्प लाए जाने की संभावना है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु को लेकर पार्टी ज्यादा मुखर रणनीति अपना सकती है। बंगाल में घुसपैठ और तुष्टीकरण, तमिलनाडु में सनातन विरोध जैसे मुद्दों को अधिवेशन के प्रस्तावों में प्रमुखता से शामिल किया जा सकता है।

राष्ट्रीय अधिवेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पार्टी का शीर्ष नेतृत्व, राष्ट्रीय और प्रदेश परिषद के सदस्य, सांसद, विधायक, मेयर, जिलाध्यक्ष और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा पार्टी के विभिन्न मोर्चों के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। 2500 से अधिक नेता-कार्यकर्ता इस अधिवेशन में भाग लेंगे। नए साल में भाजपा के सामने संगठनात्मक चुनौतियां और चुनावी दबाव दोनों हैं, ऐसे में फरवरी का यह अधिवेशन पार्टी की चुनावी रणनीति को कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए और ज़्यादा स्पष्ट करने वाला और जीत का मंत्र देने वाला हो सकता है ।

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First published on: Jan 01, 2026 01:25 PM

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