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कैसे टूटा संसद में डेडलॉक, आखिर एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के लिए कैसे राजी हुए विपक्ष और सरकार?

Lok Sabha Deadlock End : संसद में जारी गतिरोध आखिरकार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल के बाद खत्म हो गया है. सत्ता पक्ष और विपक्ष ‘पब्लिक एग्जामिनेशन अमेंडमेंट बिल, 2026’ पर मंगलवार को विस्तृत चर्चा के लिए राजी हो गए हैं. अब बिल पर बहस के बाद इसे सदन में विचार और पारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

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Lok Sabha Deadlock End : संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में पिछले कुछ दिनों से जारी गतिरोध (डेडलॉक) आखिरकार खत्म हो गया है. सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ पर मंगलवार से चर्चा करने पर सहमति जताई है. सदन की कार्यवाही के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों से सार्थक बहस की अपील की. बातचीत के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों पक्षों ने विधेयक पर विस्तृत चर्चा के लिए सहमति दे दी है. मंगलवार, 28 जुलाई से इस बेहद अहम विधेयक पर सदन में विस्तृत चर्चा शुरू होगी.

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कैसे बनी सहमति और कैसे टूटा डेडलॉक?

सोमवार को सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्षी सांसदों के भारी हंगामे और नारेबाजी के कारण लोकसभा को दिनभर के लिए स्थगित करना पड़ा था. इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गतिरोध सुलझाने की कमान खुद संभाली. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी राजनीति का नहीं, बल्कि देश के प्रतियोगी छात्रों के भविष्य का है. अध्यक्ष ओम बिरला ने विभिन्न राजनीतिक दलों के फ्लोर लीडर्स के साथ बैठक की. उन्होंने सभी दलों से अपील की कि वे गतिरोध समाप्त कर सार्थक बहस में भाग लें. लोकसभा अध्यक्ष की इस पहल और छह घंटे का समय चर्चा के लिए आवंटित करने के आश्वासन के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष, दोनों ही दल मंगलवार को विधेयक पर विस्तृत बहस के लिए सहमत हो गए.

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केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री की अपील

सदन में हंगामे के दौरान केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी विपक्ष से चर्चा की अनुमति देने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि यह विधेयक युवाओं के लिए बेहद जरूरी है और विपक्ष के कई सदस्यों ने भी इसमें संशोधन पेश किए हैं. रिजिजू ने भरोसा दिलाया कि यदि जरूरत पड़ी तो चर्चा के लिए समय और बढ़ाया जा सकता है.

नए संशोधन बिल में क्या है खास?

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा पेश किए गए इस संशोधन विधेयक में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए बेहद कड़े नियम बनाए गए हैं. सामान्य दोषियों के लिए सजा को 5 साल से बढ़ाकर 10 साल तक करने का प्रस्ताव है. नकल या पेपर लीक कराने वालों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा. संगठित अपराध के लिए न्यूनतम सजा को बढ़ाकर सात साल करने का प्रस्ताव है, जो मौजूदा कानून में निर्धारित न्यूनतम पांच साल की जेल की सजा की जगह लेगा. ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया जाएगा. अब मंगलवार को सदन में इस बिल पर चर्चा के बाद इसे विचार और पास कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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