Gaurav Pandey
लिखने-पढ़ने का शौक है। राजनीति में दूर-दूर से रुचि है। अखबार की दुनिया के बाद अब डिजिटल के मैदान में हूं। आठ साल से ज्यादा समय से देश-विदेश की खबरें लिख रहा हूं। दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे संस्थानों में सेवाएं दी हैं।
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Amit Shah On Citizenship Amendment Act : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि यह कानून आगामी लोकसभा चुनाव से पहले लागू कर दिया जाएगा। इस कानून को संसद ने दिसंबर 2019 में पारित किया था। उन्होंने सीएए को लागू करने को लेकर कांग्रेस पर उसके वादे से पीछे हटने का आरोप भी लगाया।
CAA will be implemented before general elections – HM Amit Shah 🔥
pic.twitter.com/WmpBS1KzI4— Mr Sinha (@MrSinha_) February 10, 2024
शाह ने कहा कि कांग्रेस सरकार जब देश की सत्ता में थी तब उसने सीएए लाने का वादा किया था। जब पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे थे तब कांग्रेस पार्टी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि उनका भारत में स्वागत किया जाएगा और उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह कानून नागरिकता देने के लिए लाया गया है, किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं।
CAA का नोटिफिकेशन जल्द ही हो जाएगा। pic.twitter.com/pdQEsRSBCf
— Amit Shah (@AmitShah) February 10, 2024
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमारे देश में अल्पसंख्यकों, खास तौर पर मुसलमानों को भड़काया जा रहा है। सीएए किसी की नागरिकता नहीं छीन सकता है क्योंकि इस कानून में ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है। अमित शाह ने आगे कहा कि सीएए शरणार्थियों को नागरिकता देने वाला कानून है जिन्होंने बांग्लादेश और पाकिस्तान में अत्याचारों का सामना किया था। यह कानून ऐसे लोगों को भारत की नागरिकता देने के लिए है।
CAA will be implemented before Lok Sabha : @AmitShah, Home Minister
“Minorities in our country, specially our Muslim community, are being provoked. #CAA cannot snatch away anyone’s citizenship because there is no provision in the Act. CAA is an act to provide citizenship to… pic.twitter.com/8cJk3xnl2V
— Nabila Jamal (@nabilajamal_) February 10, 2024
नागरिकता संशोधन कानून को नरेंद्र मोदी सरकार ने साल 2019 में पेश किया था। इसका उद्देश्य गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देना है। इनमें हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई शामिल हैं जो बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से माइग्रेट कर 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में आ गए थे। विपक्षी दलों ने इस कानून का जमकर विरोध किया है और इसे नागरिकता छीनने वाला बताया है।
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