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पीरियड्स साइकल बदलना क्यों हो सकता है रिस्की? एक्सपर्ट ने बताया क्या हैं महिलाओं में दिखने वाले 5 वार्निंग साइन

Periods Cycle Ka Badalna: पीरियड्स साइकल को बदलना कभी-कभार जरूरी हो सकता है, लेकिन इसे आदत बनाना खतरनाक साबित हो सकता है. इसलिए शरीर के संकेतों को समझना और समय पर ध्यान देना बेहद जरूरी है. 

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Edited By : Shadma Muskan Updated: Mar 31, 2026 09:07
why periods cycle change is risky
क्यों रिस्की है पीरियड्स साइकल बदलना? Image Credit- News24

Why Women Periods Cycle Is Change: आजकल कई महिलाएं अपने पीरियड्स साइकल को जानबूझकर बदलने की कोशिश करती हैं. यह एक नया ट्रेंड चल गया है और महिलाएं कभी ट्रैवल की वजह से, कभी शादी या किसी खास मौके की वजह से ऐसा करती हैं. ऐसा करना हेल्थ के लिए बहुत ही नुकसानदायक हो सकता है, लेकिन बार-बार ऐसा होने पर आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. कई बार यह शरीर के अंदरूनी कमी या खामियों का संकेत होता है. आयुर्वेदिक डॉक्टर आचार्य मनीष जी का कहना है कि मासिक धर्म शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे छोड़ने से हार्मोनल संतुलन बिगड़ सकता है. आइए जानते हैं क्यों पीरियड्स साइकल बदलना रिस्की हो सकता है और इसके 5 चेतावनी संकेत क्या हैं. 

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क्यों रिस्की है पीरियड्स साइकल बदलना?

आयुर्वेद में पीरियड्स को आर्टव चक्र कहा जाता है, जो शरीर के तीन दोष जैसे वात, पित्त और कफ आदि के संतुलन पर निर्भर करता है. जब आप दवाओं या घरेलू उपायों से इस चक्र को बदलते हैं तो यह संतुलन बिगड़ सकता है. इसके एक नहीं बल्कि कई कारण हो सकते हैं, जैसे-

  • हार्मोनल असंतुलन
  • अनियमित पीरियड्स
  • प्रजनन क्षमता पर असर
  • मानसिक तनाव और थकान

5 वार्निंग साइन क्या हैं? 

  • पीरियड्स का बार-बार बदलना- अगर आप साइकल बदलने के बाद नोटिस करें कि पीरियड्स कभी जल्दी तो कभी देर से आ रहे हैं तो यह संकेत है कि शरीर का नैचुरल रिदम बिगड़ चुका है. यह लंबे समय में हार्मोनल समस्या का कारण बन सकता है.
  • बहुत ज्यादा या बहुत कम ब्लीडिंग- नॉर्मल पीरियड्स में ब्लीडिंग संतुलित होती है, लेकिन साइकल छोड़ने के बाद बहुत ज्यादा ब्लीडिंग या बहुत कम ब्लीडिंग आदि दोनों ही संकेत हैं कि शरीर सही तरीके से काम नहीं कर रहा है. 
  • पेट और कमर में तेज दर्द- अगर पीरियड्स के दौरान दर्द पहले से ज्यादा बढ़ गया है तो इसे नजरअंदाज ना करें. आयुर्वेद के अनुसार, यह वात दोष के बढ़ने का संकेत हो सकता है. 
  • मूड स्विंग और चिड़चिड़ापन- साइकिल बदलने से हार्मोन प्रभावित होते हैं, जिससे अचानक गुस्सा आना, चिंता या कम नींद आने लगती है. 
  • बार-बार थकान और कमजोरी- अगर आप बिना ज्यादा काम किए ही थका हुआ महसूस कर रही हैं तो यह भी एक चेतावनी है. यह शरीर में ऊर्जा की कमी और हार्मोनल गड़बड़ी का संकेत हो सकता है. 

आयुर्वेद क्या कहता है?

आयुर्वेद में पीरियड्स को प्राकृतिक रूप से होने देना ही सही माना गया है. एक्सपर्ट्स के अनुसार बार-बार साइकल बदलने से बचें और अगर खुद ही बदल रहा है तो डॉक्टर से बात करें.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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First published on: Mar 31, 2026 09:07 AM

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