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अब दीवार पर खुद चिपक जाएगा सामान! 29 वर्षीय युवक ने बनाया अनोखा ‘मैग्नेटिक सीमेंट’, फायदे जानकर खुश हो जाएंगे आप

Magnetic Cement: अर्जेंटीना के 29 वर्षीय युवक ने 'आयरनप्लैक' नामक अनोखा मैग्नेटिक सीमेंट बनाया है, जिससे बिना कील-ड्रिल के दीवार पर सामान टंग सकेगा और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में बड़ा बदलाव आएगा.

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Magnetic Cement: बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन और घरों के इंटीरियर की दुनिया में एक ऐसा क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है, जिसकी कल्पना शायद पहले किसी ने नहीं की थी. अर्जेंटीना के 29 साल के एक युवा आविष्कारक मार्को अगस्टिन सेची ने ‘आयरनप्लैक’ (Ironplac) नाम का एक अनोखा मैग्नेटिक यानी चुंबकीय सीमेंट तैयार किया है. इस नए मटीरियल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके इस्तेमाल के बाद दीवारों पर फोटो फ्रेम, घड़ियां, आईने या दूसरा कोई भी सामान टांगने के लिए ड्रिल मशीन, कील और प्लास्टिक एंकर की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी. इस आविष्कार की मदद से अब दीवारों को बिना कोई नुकसान पहुंचाए मैग्नेट की मदद से किसी भी सामान को आसानी से चिपकाया और जब मर्जी तब हटाया जा सकेगा, जिससे घरों और दफ्तरों का पूरा लुक बदल जाएगा.

कैसे काम करता है यह मैग्नेटिक सीमेंट?

लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या यह मैग्नेटिक दीवार हर समय एक्टिव रहकर आसपास की लोहे की चीजों को अपनी तरफ खींचती रहेगी. इसका जवाब देते हुए आविष्कारक मार्को ने साफ किया है कि यह कोई बिजली से चलने वाला सिस्टम या एक्टिव चुंबक नहीं है, बल्कि यह एक पैसिव सरफेस यानी शांत दीवार की तरह काम करती है. इस सीमेंट को बनाने में एक खास तरह के खनिज और लोहे के तत्वों (फेरस फिलर्स) के मिश्रण का इस्तेमाल किया गया है. यह दीवार सिर्फ तभी काम करती है जब इसके संपर्क में कोई ऐसी चीज लाई जाए जिसके पीछे मैग्नेट लगा हो. दिखने और छूने में यह दीवार बिल्कुल आम दीवारों जैसी ही होती है, लेकिन इस पर आप चाकू, भारी औजार और यहां तक कि फावड़ा भी सिर्फ चुंबक की मदद से आसानी से टांग सकते हैं.

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कंस्ट्रक्शन वेस्ट और पर्यावरण को सुधारने में मिलेगी मदद

यह मैग्नेटिक सीमेंट आम सीमेंट की तरह ही पारंपरिक 25 किलोग्राम की बोरियों में तैयार किया जा रहा है ताकि राजमिस्त्री और बिल्डर्स इसे अपनी पुरानी आदत के मुताबिक ही आसानी से इस्तेमाल कर सकें. इसका उपयोग गीले कंस्ट्रक्शन यानी प्लास्टर के तौर पर और सूखे कंस्ट्रक्शन यानी रेडीमेड पैनल दोनों में किया जा सकता है. इस तकनीक के आने से कंस्ट्रक्शन सेक्टर में होने वाले बड़े नुकसान और मलबे को रोकने में मदद मिलेगी. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 में दुनिया भर में कार्बन उत्सर्जन का एक बड़ा हिस्सा बिल्डिंगों के निर्माण से निकला था. ऐसे में बार-बार दीवारों को तोड़ने-फोड़ने और मरम्मत के काम को रोककर यह तकनीक पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक छोटा लेकिन बेहद असरदार कदम साबित हो सकती है.

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बाजार में आने से पहले चल रहा है बड़ा ट्रायल

यह मैग्नेटिक सीमेंट अभी पूरी तरह से बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है, क्योंकि इसके प्रोटोटाइप का अलग-अलग कंस्ट्रक्शन साइटों पर कड़ा टेस्ट और ट्रायल चल रहा है. इस आविष्कार की वैज्ञानिक प्रामाणिकता को लेकर साल 2026 में ईरान की गुइलान यूनिवर्सिटी और ऑस्ट्रेलिया की एडिलेड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने भी एक रिसर्च पेपर जारी किया है, जिसमें सीमेंट मटीरियल में मैग्नेटिक रेत के इस्तेमाल को सही ठहराया गया है. फिलहाल मार्को अपने इस अनोखे फॉर्मूले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेटेंट कराने की कानूनी प्रक्रिया से गुजर रहे हैं. बाजार में आने से पहले वैज्ञानिक इस बात की बारीकी से जांच कर रहे हैं कि यह सीमेंट लंबे समय तक कितना वजन उठा सकता है और नमी या दोबारा पेंट करने पर इसका क्या असर पड़ता है. अगर यह सारे टेस्ट पास कर लेता है, तो आने वाले समय में दीवारों पर कील ठोकना हमेशा के लिए एक पुरानी बात हो जाएगी.

First published on: Jun 04, 2026 01:34 PM

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About the Author

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में तीन वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. राजा ने पत्रकारिता करियर की शुरुआत Zee Media के डिजिटल प्लेटफॉर्म India.Com हिंदी से की थी. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.

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राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में तीन वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. राजा ने पत्रकारिता करियर की शुरुआत Zee Media के डिजिटल प्लेटफॉर्म India.Com हिंदी से की थी. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.

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