दक्षिण लाल सागर में यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही लगातार अपना कंट्रोल बढ़ाते जा रहे हैं. उन्होंने इस इलाके के कई अहम द्वीपों पर कब्जा कर लिया है. इस वजह से हूती ग्रुप की दक्षिण लाल सागर वाले प्रमुख समुद्री रूट पर पकड़ मजबूत हो गई है. हूतियों ने ‘ग्रेटर हनीश’ और ‘लेसर हनीश’ नाम के द्वीपों पर कब्जा किया है. ये विद्रोही बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.
इन द्वीपों पर कब्जा होने से हूतियों के लिए लाल सागर के रास्ते जाने वाले सऊदी अरब के कच्चे तेल पर निशाना आसान हो गया. होर्मुज स्ट्रेट में ईरान जहाजों को निशाना बना रहा है. ऐसे में वैकल्पिक तौर पर सऊदी अरब ने लाल सागर के रास्ते कच्चा तेल भेजना शुरू किया था. लेकिन अब हूती विद्रोही सऊदी अरब के ऑयल इंफ्रा और लाल सागर में उसके जहाजों को निशाना बना रहा है. इसके वजह से ग्लोबल ऑयल सप्लाई और तेल की कीमतों पर असर पड़ रहा है.
यह भी पढ़ें : हूती विद्रोहियों का सऊदी अरब पर भीषण हमला, मिसाइल-ड्रोन अटैक से थर्राए 3 शहर, इमरजेंसी का हुआ ऐलान
कौन हैं हूती विद्रोही?
हूती विद्रोही गुट को अंसार अल्लाह के नाम से भी जाना जाता है, जिसका मतलब होता है अल्लाह के समर्थक. हूती विद्रोहियों का यमन के ज्यादात्तर हिस्सों पर कब्जा है. इनमें यमन की राजधानी सना और सऊदी अरब से नजदीकी पश्चिमी और उत्तरी इलाके भी शामिल हैं. इस गुट की स्थापना 1990 दशक में हुई थी. यह बड़ा नाम बनकर उभरा साल 2014 में, जब इस गुट ने यमन की सरकार के खिलाफ बगावत करके उसे गिरा दिया. इसके साथ ही यमन में गृह युद्ध की शुरुआत हो गई. सऊदी अरब के नेतृत्व हवाई हमले किए गए थे. इस फैसले को अमेरिका का भी समर्थन मिला हुआ था. इन हमलों में करीब 9 हजारों आम नागरिकों की मौत हुई थी.
गृह युद्ध से यमन का ऐसा हाल है कि वहां की करीब आधी से ज्यादा जनसंख्या को मानवीय मदद की जरूरत है.
यह भी पढ़ें : हमले की जद में फिर आए सऊदी-यूक्रेन, हूती और रूस ने किया मिसाइल अटैक
निशाने पर सऊदी अरब क्यों?
ईरान के समर्थन से ये गुट सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के खिलाफ कई वर्षों से लड़ाई लड़ रहा है. हालांकि, दोनों तरफ से कई बार शांति वार्ता की भी कोशिश हुई है. दोनों के बीच 2022-23 में शांति समझौता भी हुआ था. हालांकि, 2026 में फिर दोनों में तनाव पैदा हो गया. हूदी विद्रोहियों ने दोबारा से सऊदी अरब पर हमले करने शुरू कर दिए.
बताया जाता है कि पहले यह गुट ईरान से हथियार लेता था, अब यह यमन में ही हथियार तैयार कर रहा है. यमन सरकार का साथ देने की वजह से हूती विद्रोही सऊदी को अपना दुश्मन मानते हैं. इसी वजह से वह लगातार सऊदी अरब पर हमले कर रहा है.
यह भी पढ़ें : हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में दबोची सऊदी अरब की ‘गर्दन’, पेरिम द्वीप पर किया कब्जा, अरामको की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त
कहां से चल रही यमन सरकार?
2014 में हूतियों ने यमन की सरकार के खिलाफ विद्रोह कर दिया था. उस वक्त इन विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सना पर भी कब्जा कर लिया था. ऐसे में अदन को अंतरिम राजधानी बना दिया गया है. अब यमन की सरकार अदन से ही काम करती है.
अभी यमन सरकार के प्रमुख रशाद अल-अलीमी हैं. अल-अलीमी ने साल 2022 में सत्ता संभाली थी. इनसे पहले यमन की सरकार राष्ट्रपति अब्द-रब्बू मंसूर हादी चला रहे थे. हादी और हूतियों के बीच संबंध बहुत तनावपूर्ण थे.
संबंधित खबरें
ब्राजील के चुनाव में फंसा पेंच, क्या है 'रनऑफ' प्रक्रिया जिसमें होगा फैसला?
7 hrs agoCEC ज्ञानेश कुमार हो सकते हैं गिरफ्तार? केरलम केस में कितनी हो सकती सजा
9 hrs agoकिन्हें दिया जाता है नोबेल पुरस्कार, अब तक कितने भारतीयों को मिला ये अवॉर्ड
1 day agoटैक्स अधिकारियों की अरेस्ट पावर क्यों खत्म करना चाहती है केंद्र सरकार?
1 day agoक्या है अमेरिका का वीजा बॉन्ड और 50 देशों पर क्यों हुआ लागू ? भारत को छूट
2 days agoक्यों हुई अजय राय की छुट्टी, कैसे मिली आराधना को UP की कमान?
3 days agoकांग्रेस की स्ट्रेटेजी : UP में क्यों खेला 40 साल पुराना 'ट्रिपल कार्ड'?
3 days agoचाकू, कांटा, चम्मच और कुल्हाड़ी... विमान में क्यों जरूरी हैं हथियार?
5 days agoITMS क्या है? मोदी सरकार का ये तोहफा दिल्लीवालों के लिए कैसे बनेगा वरदान
6 days ago'अल नीनो' क्या है, जो बदल सकता है वर्ल्ड क्लाइमेट, भारत पर कैसा होगा असर?
6 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines