विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ में सब कुछ सही नहीं चलता दिख रहा है. इंडिया टुडे ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा है, शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी आगामी मानसून सत्र में नरेंद्र मोदी सरकार के परिसीमन विधेयक का समर्थन कर सकती है. अगर ऐसा होता है, तो यह विपक्षी गठबंधन के लिए एक बड़ा झटका होगा, क्योंकि पिछले संसद सत्र में सभी विपक्षी दलों ने एकजुट होकर इस बिल के खिलाफ मतदान किया था. यह कयासबाजी ऐसे समय में तेज हुई है जब एनसीपी के दोनों गुटों के वरिष्ठ नेताओं द्वारा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ देर रात एक गुप्त बैठक करने की खबरें सामने आई हैं. इसके बाद से दोनों गुटों के फिर से एक होने और केंद्र में एनडीए को समर्थन देने की चर्चाएं गर्म हैं.
सुप्रिया सुले ने क्या रखी शर्त
इस पूरे सियासी घटनाक्रम पर शरद पवार गुट वाली एनसीपी की सांसद सुप्रिया सुले ने स्थिति स्पष्ट की है. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सुले ने कहा कि पार्टी का अंतिम फैसला बिल के अंतिम स्वरूप और ड्राफ्ट पर निर्भर करेगा. उन्होंने कहा, ‘अगर सरकार सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में 50 फीसदी की बढ़ोतरी का प्रावधान करती है और इसे लागू करने की स्पष्ट रूपरेखा तैयार करती है, तो हम इसका समर्थन करेंगे.’
सुप्रिया सुले की यह शर्त केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस आश्वासन से मेल खाती है, जो उन्होंने अप्रैल में लोकसभा में चर्चा के दौरान दिया था. शाह ने तब कहा था कि सरकार बिल में संशोधन करने को तैयार है ताकि 50% सीटों की एकसमान बढ़ोतरी हो और किसी भी राज्य को नुकसान न हो.
कांग्रेस की चिंता बढ़ी
शरद पवार के इस संभावित रुख से कांग्रेस खेमे में हलचल तेज हो गई है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि भाजपा इस बिल को पास कराने के लिए शरद पवार की एनसीपी और दक्षिण की डीएमके का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही है. चिदंबरम ने दोनों क्षेत्रीय दलों से अपील की है कि वे इस कानून का समर्थन न करें, क्योंकि मौजूदा फॉर्मूले के तहत परिसीमन होने से उन राज्यों को नुकसान होगा जिन्होंने राष्ट्रीय जनसंख्या नीति का पालन करते हुए जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की है.
वहीं, मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ बैठक पर सुप्रिया सुले ने साफ किया कि जयंत पाटिल नगर परिषद अध्यक्ष के खिलाफ की गई कार्रवाई के सिलसिले में आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री से मिलने गए थे और इसमें कुछ भी गुप्त नहीं था.
बता दें, केंद्र सरकार लोकसभा की क्षमता को 850 सीटों तक बढ़ाने और महिला आरक्षण को लागू करने के लिए ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ लेकर आई थी. 17 अप्रैल को हुए मतदान में यह बिल लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में नाकाम रहा था. अब सरकार 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में इसे दोबारा पेश करने की तैयारी में है.