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क्या तेल ही है अमेरिका और वेनेजुएला के बीच असली फसाद की जड़? डोनाल्ड ट्रंप क्यों चाहते हैं वहां तख्तापलट

वेनेजुएला का अमेरिका के साथ कई दिनों से तनाव चल रहा है. इसी बीच शनिवार को वेनेजुएला की राजधानी काराकास एक के बाद एक कई धमाके हुए. जिसके बाद पूरे देश में इमरजेंसी का ऐलान कर दिया गया.

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Edited By : Arif Khan Updated: Jan 3, 2026 16:00
वेनेजुएला और दुनिया की महाशक्ति अमेरिका के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा है.

वेनेजुएला की राजधानी काराकास शनिवार तड़के एक के बाद एक कई धमाकों से दहल उठी. इसके बाद वहां इमरजेंसी का ऐलान कर दिया गया. पूरे देश में भगदड़ का माहौल पैदा हो गया. वेनेजुएला का अमेरिका के साथ कई दिनों से तनाव चल रहा है. इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी बीवी समेत पकड़ लिया गया और अमेरिकी सैनिक उन्हें देश के बाहर ले गए.

वेनेजुएला और दुनिया की महाशक्ति अमेरिका के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा है. इस तनाव के पीछे भू-राजनीतिक वर्चस्व, प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा और बदलती जियोपॉलिटिक्स है. अमेरिका ने निकोलस मादुरो की सरकार पर ‘नार्को-टेररिज्म’ का गंभीर आरोप लगाया है. साथ ही मादुरो के सिर पर करोड़ों डॉलर का इनाम रखा है. वेनेजुएला के तटों पर अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी बढ़ा दी गई है. अमेरिका का कहना है कि मादुरो सरकार की नीतियों की वजह से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और ड्रग तस्करी बढ़ी है. दोनों देशों के बीच की खाई और गहरी होती जा रही है. रूस और चीन जैसे देशों का वेनेजुएला को समर्थन ने इसमें आग में घी का काम किया है.

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अब जानिए, कि आखिर वेनेजुएला से अमेरिका क्या चाहता है…

तेल पर नजर : वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. पूरे विश्व का करीब 18 फीसदी तेल भंडार वेनेजुएला के पास है. अमेरिका के लिए यह क्षेत्र हमेशा अहम रहा है. अमेरिका का मानना है कि मादुरो की सरकार आने के बाद वहां इसका प्रबंधन खराब हुआ है. मादुरो जहां दूसरे देशों को तेल बेचने की चाहत रखता है, वहीं ट्रंप सरकार चाहती है कि वहां के तेल भंडार से अमेरिका की ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति हो. अमेरिका चाहता है कि वहां पर तेल उद्योग में प्राइवेट निवेश हो, ताकि अमेरिकी कंपनियां का प्रभुत्व स्थापित हो.

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अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल एक्सपोर्ट पर कड़े बैन लगा रखे हैं. इसके तहत वेनेजुएला दूसरे देशों को अपना तेल नहीं बेच सकता. जिसकी वजह से वहां की सरकार के आय के स्रोत पर असर पड़ रहा है. वेनेजुएला ‘घोस्ट जहाज’ के जरिए दूसरे देशों या कंपनियों को तेल बेच रहा है. इसको लेकर अमेरिका ने वेनेजुएला के तटों की ‘नौसैनिक नाकाबंदी’ कर रखी है. अमेरिका ने कई संदिग्ध तेल टैंकरों को जब्त भी किया है.

यह भी पढ़ें : वेनेजुएला के राष्ट्रपति को बीवी समेत पकड़कर देश से बाहर ले गए अमेरिकी सैनिक, डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा

तख्तापलट की चाहत : अमेरिका मादुरो को अवैध तानाशाह मानता है, उसका कहना है कि मादुरो ने 2018 के चुनाव में धांधली करके सत्ता पाई थी. अमेरिका चाहता है कि वहां तख्ता पलट किया जाए. वहीं, मादुरो का आरोप है कि अमेरिका उनकी सरकार को गिराकर वेनेजुएला के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है. अमेरिका वहां जुआन गुआइदो या मारिया कोरिना मचाडो जैसे विपक्षी नेताओं का समर्थन करता रहा है.

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बदलती जियोपॉलिटिक्स : वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो, रूस, चीन और ईरान को अपना करीबी मानता है. जबकि डोनाल्ड ट्रंप को यह पसंद नहीं है. अमेरिका बिल्कुल नहीं चाहता है कि पश्चिमी गोलार्ध में इन देशों का प्रभाव बढ़े. वह इसे अपने लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती मानता है. अमेरिका हमेशा से ‘मुनरो सिद्धांत’ को मानता आया है, जिसके तहत पश्चिमी गोलार्ध यानी उत्तर और दक्षिण अमेरिका में किसी भी बाहरी शक्ति का दखल नहीं होना चाहिए. इसलिए अमेरिका वहां मादुरो को हटाकर अपनी पसंद की सरकार लाना चाहता है.

नार्को-टेररिज्म का आरोप: ट्रंप सरकार ने निकोलस मादुरो और उनके करीबी सहयोगियों पर बड़े पैमाने पर नार्को टेररिज्म यानी नशीले पदार्थों की तस्करी का आरोप लगाया है. अमेरिका ने मादुरो को ‘नार्को-टेररिस्ट’ घोषित किया है. उनकी गिरफ्तारी में मदद के लिए 50 मिलियन डॉलर का इनाम रखा है. अमेरिका का दावा है कि ड्रग्स से होने वाली कमाई का यूज मादुरो अपनी सरकार को बचाने के लिए कर रहे हैं. साथ ही अमेरिका का कहना है कि वेनेजुएला के जरिए कोकीन की तस्करी अमेरिका में की जा रही है, यह उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है.

First published on: Jan 03, 2026 03:06 PM

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