पुराने 'दोस्त' भी कांग्रेस को क्यों कह रहे 'मुस्लिम लीग'? जानिए क्यों 'जी का जंजाल' बने ये चुनावी आंकड़े

कांग्रेस ने असम की 99 सीटों में से 19 पर जीत हासिल की, जिनमें जीतने वाले 18 मुस्लिम उम्मीदवार हैं. वहीं, बंगाल में 292 सीटों में से केवल दो सीटें कांग्रेस के खाते में आई हैं, वहां भी जीतने वाले दोनों ही मुस्लिम हैं.

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कांग्रेस को इस 'छवि संकट' के बारे में साल 2014 में ही आगाह कर दिया गया था.

भारतीय जनता पार्टी आमतौर पर कांग्रेस पर ‘अल्पसंख्यक तुष्टिकरण’ का आरोप लगाती रही है, लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद यह हमला कांग्रेस के ही एक पुराने सहयोगी ने किया है. असम में AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने बयान दिया है कि ‘कांग्रेस अब मुस्लिम लीग बन गई है’. इस बयान ने एक नई सियासी बहस छेड़ दी है.

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क्या कहते हैं असम और बंगाल के आंकड़े

असम और पश्चिम बंगाल के नतीजों ने इस धारणा को सबसे ज्यादा हवा दी है. कांग्रेस इन राज्यों में जहां भी जीती है, वहां लगभग सभी चेहरे अल्पसंख्यक समुदाय के हैं. कांग्रेस ने असम की 126 में से 99 सीटों पर चुनाव लड़ा और केवल 19 पर जीत हासिल की. इन 19 विजेताओं में से 18 मुस्लिम उम्मीदवार हैं. वहीं, पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने 292 सीटों पर किस्मत आजमाई लेकिन उसे सिर्फ 2 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा. ये दोनों ही सीटें मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीती हैं. बंगाल में कांग्रेस ने TMC के 47 से भी ज्यादा 63 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था.

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केरल में मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन

केरल में जहां कांग्रेस के नेतृत्व वाला UDF गठबंधन सत्ता में लौटा है, वहां भी सीटों का समीकरण कुछ इसी ओर इशारा करता है. UDF की 102 सीटों में से 22 सीटें ‘इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग’ (IUML) की हैं. केरल की नई विधानसभा में कुल 35 मुस्लिम विधायक होंगे, जिनमें से 30 अकेले UDF गठबंधन से हैं. इनमें से 22 IUML से हैं. कांग्रेस के 63 MLA में से आठ मुस्लिम हैं.

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तमिलनाडु में, जहां कांग्रेस ने DMK के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था. उसने पांच सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे. उसने दो सीटें जीतीं, जिनमें से एक उम्मीदवार मुस्लिम है.

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केरल और असम में कांग्रेस और उसके सहयोगियों द्वारा खड़े किए गए मुस्लिम उम्मीदवारों का स्ट्राइक रेट 80% से ज्यादा है. इसका मतलब है कि उनकी ओर से खड़े किए गए 10 में से आठ मुस्लिम उम्मीदवार जीते हैं.

12 साल पुरानी वो चेतावनी

दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस को इस ‘छवि संकट’ के बारे में साल 2014 में ही आगाह कर दिया गया था. 2014 के आम चुनाव में मिली करारी हार के बाद वरिष्ठ नेता एके एंटनी की अध्यक्षता में एक समिति बनी थी. एंटनी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा था कि अल्पसंख्यकों के साथ कांग्रेस की बढ़ती निकटता ने उसकी ‘धर्मनिरपेक्ष साख’ पर सवाल खड़े कर दिए हैं. एंटनी ने आगाह किया था कि अगर इस धारणा को नहीं बदला गया, तो सांप्रदायिक ताकतों को कांग्रेस के भीतर जगह मिल सकती है.

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बदरुद्दीन अजमल ने क्यों कहा ‘मुस्लिम लीग’?

असम में कांग्रेस और AIUDF का रिश्ता काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है. कांग्रेस ने 2021 में अजमल के साथ गठबंधन किया था, लेकिन उसे अपेक्षित परिणाम नहीं मिले. 2026 में कांग्रेस ने AIUDF से किनारा कर लिया क्योंकि उसे लगा कि वह खुद मुस्लिम वोटों को अपने खाते में ला सकती है. इस चुनाव में AIUDF सिर्फ 2 सीटों पर सिमट गई, जबकि कांग्रेस ने उनके वोट बैंक में सेंध लगाकर 18 मुस्लिम विधायक जिता लिए. इन नतीजों से बदरुद्दीन अजमल काफी नाराज दिख रहे हैं.

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कांग्रेस के लिए क्या है असली खतरा?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि कांग्रेस एक ‘बबल’ में फंसती जा रही है. असम और बंगाल में हिंदू वोटों का भारी ध्रुवीकरण बीजेपी के पक्ष में हुआ है. जिस पार्टी की पहचान ‘अम्ब्रेला पार्टी’ (सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाली) की थी, वह अब चुनावी रूप से अल्पसंख्यक बहुल इलाकों तक सीमित होती दिख रही है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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