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कौन था ‘रामायण’ में जामवंत बना एक्टर, 39 साल से कहां हैं गायब? प्रेमानंद जी महाराज भी रहे उनके मुरीद
रामानंद सागर की 'रामायण' का एक-एक किरदार काफी पॉपुलर रहा था. ऐसे में आज आपको बुलंद आवाज वाले जामवंत के बारे में बता रहे हैं कि आखिर इस रोल से जिसने लोगों को ही नहीं बल्कि प्रेमानंद महाराज को भी मुरीद बना लिया था अब वो कहां हैं और 39 साल बाद उनकी स्थिति कैसी है?
कौन था 'रामायण' में जामवंत बना एक्टर? (File photo)
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रामानंद सागर की 'रामायण' 80 के दशक का पॉपुलर सीरियल रहा है. इसे लोग आज भी देखना पसंद करते हैं. इस सीरियल के बाद 'रामायण' का हर चरित्र पॉपुलर हो गया था, जिसकी लोग आज भी तारीफ करते हैं. वहीं, राम-सीता से लेकर लक्ष्मण और हनुमान तक की लोग आज भी पूजा करते हैं. इतना ही नहीं, रावण, विभीषण और मेघनाद तक ने स्क्रीन पर छाप छोड़ी. इसी में से एक श्रीराम की सेना में जामवंत भी थे, जिसने अपनी बुलंद आवाज से सभी को मुरीद बना लिया था. यहां तक कि प्रेमानंद महाराज भी उनके मुरीद रहे हैं.
ऐसे में अब 39 साल हो चुके हैं और जामवंत का वो किरदार आज भी लोगों के जहन में है. लेकिन लोग आज भी ये सोचते हैं कि इस रोल को प्ले किसने किया था, जिसने इतनी जबरदस्त छाप स्क्रीन पर छोड़ी थी तो चलिए हम बताते हैं वो कौन था और आज 39 साल बाद भी वह कहां और क्या कर रहे हैं.
दरअसल, रामानंद सागर की 'रामायण' में जामवंत की भूमिका निभाने वाले एक्टर कोई और नहीं बल्कि श्रीकांत राजशेखर उपाध्याय थे. सीरियल में उनका असली चेहरा तो किसी ने नहीं देखा था लेकिन बुलंद आवाज के दम पर ही उन्होंने करोड़ों लोगों का अपना मुरीद बना लिया था. राज शेखर उत्तर प्रदेश के भदोही जिल के हरिहरपुर गांव के रहने वाले हैं और वह जामवंत के किरदार में काफी मशहूर हुए थे. उन्हें आज भी अपने इसी किरदार के लिए याद किया जाता है.
बचपन से था एक्टिंग का शौक
राजशेखर उपाध्याय को लेकर बताया जाता है कि उन्हें स्कूल के दिनों से ही एक्टिंग का चस्का लग गया था. उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी थी. लेकिन जब आगे की पढ़ाई के लिए वह बनारस गए तो वहां होने वाली राम लीला में हिस्सा लेने लगे. फिर एक्टिंग का शौक उनके सिर चढ़ गया. ये शौक इतना बढ़ गया कि उन्होंने नाटकों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया. वह नाटक खुद बनाने भी लगे. बताया जाता है कि ऐसे ही एक नाटक के दौरान रामानंद सागर की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने उन्हें 'विक्रम और बेताल' के लिए साइन कर लिया.
इस तरह से राजशेखर उपाध्याय ने 'विक्रम और बेताल' से टीवी पर डेब्यू किया और यहां से ही उनकी किस्मत का दरवाजा खुल गया. इसके बाद वो रामानंद सागर की 'रामायण' में नजर आए. इसके बारे में उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था और कहा कि 'विक्रम और बेताल' रामानंद सागर ने काम किया, जो उन्हें बहुत पसंद आया. उन्होंने बताया था कि 'रामायण' में ज्यादातर कलाकार इसी शो से ही थे तो उन्होंने जामवंत के किरदार के लिए उन्हें चुन लिया. हालांकि, पहले वो विभीषण बने थे लेकिन बाद में उन्हें दमदार आवाज की वजह से जामवंत का रोल मिल गया था.
जामवंत के किरदार से राजशेखर घर-घर मशहूर हो गए थे. इसके बाद उनेहोंने कई टीवी शोज और फिल्मों में काम किया था. इसमें 'जय हनुमान', 'महाभारत' और 'अदालत' जैसे शोज शामिल है.
39 साल बाद कहां और क्या करते हैं राजशेखर उपाध्याय?
बहरहाल, अगर अब बात की जाए कि 39 साल के बाद राजशेखर उपाध्याय कहां और क्या कर रहे हैं तो पहले वह मुंबई में काम कर रहे. वह नालासोपारा में रहते थे. यहां पर एक्टिंग में बिजी थे. लेकिन कोविड 19 महामारी के बाद वह कुछ दिनों के लिए गांव लौट गए थे, जिसके बाद वह वहीं रह गए. बताया जाता है कि तभी से वह वहीं पर राम कथा का प्रचार प्रसार करने लगे थे. जहां भी राम कथा का आयोजन होता था तो उन्हें बुला लिया जाता था. उनके तीन भाई-बहन हैं. उनके पिता गांव के बड़े जमींदार थे.
राजशेखर उपाध्याय ने साल 2023 में प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की थी. उन्हें वहां पर देखकर वह काफी खुश हो गए थे. इस दौरान राजशेखर उपाध्याय ने जामवंत की आवाज में कुछ डायलॉग बोलकर भी दिखाए थे. इसे देखकर वह उनके मुरीद हो गए थे और खूब खुश हुए थे.
रामानंद सागर की ‘रामायण’ 80 के दशक का पॉपुलर सीरियल रहा है. इसे लोग आज भी देखना पसंद करते हैं. इस सीरियल के बाद ‘रामायण’ का हर चरित्र पॉपुलर हो गया था, जिसकी लोग आज भी तारीफ करते हैं. वहीं, राम-सीता से लेकर लक्ष्मण और हनुमान तक की लोग आज भी पूजा करते हैं. इतना ही नहीं, रावण, विभीषण और मेघनाद तक ने स्क्रीन पर छाप छोड़ी. इसी में से एक श्रीराम की सेना में जामवंत भी थे, जिसने अपनी बुलंद आवाज से सभी को मुरीद बना लिया था. यहां तक कि प्रेमानंद महाराज भी उनके मुरीद रहे हैं.
ऐसे में अब 39 साल हो चुके हैं और जामवंत का वो किरदार आज भी लोगों के जहन में है. लेकिन लोग आज भी ये सोचते हैं कि इस रोल को प्ले किसने किया था, जिसने इतनी जबरदस्त छाप स्क्रीन पर छोड़ी थी तो चलिए हम बताते हैं वो कौन था और आज 39 साल बाद भी वह कहां और क्या कर रहे हैं.
दरअसल, रामानंद सागर की ‘रामायण’ में जामवंत की भूमिका निभाने वाले एक्टर कोई और नहीं बल्कि श्रीकांत राजशेखर उपाध्याय थे. सीरियल में उनका असली चेहरा तो किसी ने नहीं देखा था लेकिन बुलंद आवाज के दम पर ही उन्होंने करोड़ों लोगों का अपना मुरीद बना लिया था. राज शेखर उत्तर प्रदेश के भदोही जिल के हरिहरपुर गांव के रहने वाले हैं और वह जामवंत के किरदार में काफी मशहूर हुए थे. उन्हें आज भी अपने इसी किरदार के लिए याद किया जाता है.
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बचपन से था एक्टिंग का शौक
राजशेखर उपाध्याय को लेकर बताया जाता है कि उन्हें स्कूल के दिनों से ही एक्टिंग का चस्का लग गया था. उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी थी. लेकिन जब आगे की पढ़ाई के लिए वह बनारस गए तो वहां होने वाली राम लीला में हिस्सा लेने लगे. फिर एक्टिंग का शौक उनके सिर चढ़ गया. ये शौक इतना बढ़ गया कि उन्होंने नाटकों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया. वह नाटक खुद बनाने भी लगे. बताया जाता है कि ऐसे ही एक नाटक के दौरान रामानंद सागर की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने उन्हें ‘विक्रम और बेताल’ के लिए साइन कर लिया.
इस तरह से राजशेखर उपाध्याय ने ‘विक्रम और बेताल’ से टीवी पर डेब्यू किया और यहां से ही उनकी किस्मत का दरवाजा खुल गया. इसके बाद वो रामानंद सागर की ‘रामायण’ में नजर आए. इसके बारे में उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था और कहा कि ‘विक्रम और बेताल’ रामानंद सागर ने काम किया, जो उन्हें बहुत पसंद आया. उन्होंने बताया था कि ‘रामायण’ में ज्यादातर कलाकार इसी शो से ही थे तो उन्होंने जामवंत के किरदार के लिए उन्हें चुन लिया. हालांकि, पहले वो विभीषण बने थे लेकिन बाद में उन्हें दमदार आवाज की वजह से जामवंत का रोल मिल गया था.
जामवंत के किरदार से राजशेखर घर-घर मशहूर हो गए थे. इसके बाद उनेहोंने कई टीवी शोज और फिल्मों में काम किया था. इसमें ‘जय हनुमान’, ‘महाभारत’ और ‘अदालत’ जैसे शोज शामिल है.
39 साल बाद कहां और क्या करते हैं राजशेखर उपाध्याय?
बहरहाल, अगर अब बात की जाए कि 39 साल के बाद राजशेखर उपाध्याय कहां और क्या कर रहे हैं तो पहले वह मुंबई में काम कर रहे. वह नालासोपारा में रहते थे. यहां पर एक्टिंग में बिजी थे. लेकिन कोविड 19 महामारी के बाद वह कुछ दिनों के लिए गांव लौट गए थे, जिसके बाद वह वहीं रह गए. बताया जाता है कि तभी से वह वहीं पर राम कथा का प्रचार प्रसार करने लगे थे. जहां भी राम कथा का आयोजन होता था तो उन्हें बुला लिया जाता था. उनके तीन भाई-बहन हैं. उनके पिता गांव के बड़े जमींदार थे.
प्रेमानंद भी हुए थे मुरीद
राजशेखर उपाध्याय ने साल 2023 में प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की थी. उन्हें वहां पर देखकर वह काफी खुश हो गए थे. इस दौरान राजशेखर उपाध्याय ने जामवंत की आवाज में कुछ डायलॉग बोलकर भी दिखाए थे. इसे देखकर वह उनके मुरीद हो गए थे और खूब खुश हुए थे.