The Sabarmati Report: आज से करीब 23 साल पहले घटी थी एक ऐसी घटना, जिसमें पलक झपकते ही चली गई एक-दो नहीं बल्कि 59 लोगों की जान। ट्रेन थी ‘साबरमती एक्सप्रेस’ और साल था 2002… किसे पता था कि जिस ट्रेन में लोग अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए सफर कर रहे हैं, वो उन्हें मौत के मुंह में ले जाएगी। फिल्म में विक्रांत मैसी कहते हैं कि ‘गोधरा कांड’ जिसके बारे में किसी ने बात नहीं की। अब इसी घटना पर बनी फिल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ ओटीटी पर आ चुकी है।
फिल्म की कहानी
इस फिल्म की कहानी कोई काल्पनिक कहानी नहीं है बल्कि ‘गोधरा कांड’ में झुलसे उन लोगों की चीखें हैं, जो आज भी हर भारतवासी के जहन में हैं। ये कहानी ना सिर्फ एक ट्रेन की है और ना ही ‘साबरमती एक्सप्रेस’ की, बल्कि ये कहानी है उन लोगों की है जिनको अंदाजा भी नहीं था कि जिस ट्रेन में वो सफर कर रहे हैं वो चलेगी तो जरूर, लेकिन कभी रुकेगी नहीं। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे ‘साबरमती एक्सप्रेस’ में आग लगी और किस तरह से एक साजिश को घटना करार दिया गया। इसके बाद शुरू होती है सच को सामने लाने की जंग, जिसमें लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर भी सवाल खड़े हुए।
साजिश कैसे बनी एक घटना?
फिल्म दिखाती है कि ‘साबरमती एक्सप्रेस’ में जब आग लगी, तो उससे ये तो साफ हो गया था कि किसी गलती की वजह से ये आग लगी नहीं है बल्कि लगवाई गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि ट्रेन के सिर्फ दो डिब्बे ही इस आग में झुलसे थे और बाकी की बोगियों को रवाना कर दिया गया था। अब सवाल ये था कि अगर ये हादसा नहीं था तो किसने इस साजिश को अंजाम दिया।
सच की तलाश
‘साबरमती एक्सप्रेस’ सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि इस घटना ने गुजरात के माथे पर ‘गोधरा कांड’ नाम की अमिट छाप भी छोड़ी थी, लेकिन कहते हैं ना कि झूठ कितना भी पॉवरफुल क्यों ना हो, लेकिन सच तो एक दिन बाहर आ ही जाता है। भले ही समय लगा हो लेकिन इस साजिश से पर्दा उठा और उन 59 बेगुनाहों की चीखों को भी इंसाफ मिला।
क्यों देखें फिल्म?
इस फिल्म को हर भारतवासी को देखना चाहिए। हर उस इंसान को देखना चाहिए, जो आज भी ‘गोधरा कांड’ के बारे में नहीं जानता। हर उस इंसान के लिए ये फिल्म बनाई गई है, जो अपने देश से प्यार करता है, क्योंकि ‘साबरमती एक्सप्रेस’ भले ही ‘Burning Train’ बन गई थी, लेकिन इस ट्रेन में सफर करने वाले लोग हमारे अपने थे, हिंदुस्तानी थे। इसलिए हर किसी को इस फिल्म को देखना चाहिए।