Gulzar Birthday: मशहूर शायर, गीतकार और फिल्ममेकर गुलजार आज अपना 92वां जन्मदिन मना रहे हैं. उनके गानों से लेकर नज्में तक का हर कोई दीवाना है. आज वो अपने लिखे गानों से करोड़ों लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं. लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि उन्होंने अपनी नई पहचान बनाने के लिए अपनी पुरानी पहचान को पूरी तरह से पीछे छोड़ दिया था. जी हां गुलजार ने अपना करियर शुरू करने से पहले ही अपना नाम बदल दिया था. आज उनका नया नाम गुलजार दुनियाभर में फेमस है. चलिए आपको भी बताते हैं नाम बदलने के पीछे आखिर क्या वजह थी.
पुराने नाम को छोड़ा पीछे
गुलजार का असली नाम ‘संपूर्ण सिंह कालरा’ है. जी हां बहुत कम लोग गुलजार के पुराने नाम को जानते हैं. परिवार के खिलाफ जाकर नाम बदलना उनकी लाइफ का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ था. दरअसल गुलजार का जन्म 18 अगस्त 1934 में पंजाब के दीना में हुआ था, जो अब पाकिस्तान के झेलम जिले में है. भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के समय गुलजार को अपना घर और अपना गांव छोड़कर आना पड़ा था. बंटवारे के समय उनका परिवार मुश्किलों को पार करते हुए अमृतसर पहुंचा था, इसके बाद वो दिल्ली चले गए.
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परिवार के खिलाफ गए गुलजार
गुलजार और उनका परिवार दिल्ली में ही गुजारा कर रहा था. लेकिन एक समय आया जब गुजारा मुश्किल होने लगा तो उनके परिवार ने गुलजार को काम करने के लिए मुंबई भेज दिया. वहीं गुलजार को शायरियां और कविता लिखने का बहुत शौक था, लेकिन उनका परिवार इसके खिलाफ था. दरअसल परिवार को लगता था कि शायरियां लिखकर गुजारा नहीं होता. जिसके बाद उनके परिवार ने उन्हें सख्ती से शायरियां लिखने के लिए मना कर दिया.
नाम बदलकर मिली पहचान
परिवार के कहने पर गुलजार मुंबई के एक गैराज में मैकेनिक का काम करने लगे. दिनभर पुरानी गाड़ियों को पेंट करने के बाद भी उनके दिमाग में शायरियां ही चलती रहती थी. फिर क्या था परिवार के खिलाफ जाकर गुलजार ने लिखना शुरू कर दिया. लेकिन किसी को ना पता चले इसके लिए उन्होंने अपना नाम ‘संपूर्ण सिंह कालरा’ से बदलकर गुलजार रख लिया. वो अपनी शायरियां गुलजार के नाम से ही लिखते थे. देखते ही देखते उनकी लिखी शायरियां और कविता फेमस हो गईं और उनका नाम घर-घर मशहूर हो गया.
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बॉलीवुड में कैसे मिला ब्रेक?
वहीं गैराज में काम करने के दौरान गुलजार ‘प्रोग्रेसिव राइटर्स एसोसिएशन’ में जाने लगे और यहां उनकी मुलाकात शैलेंद्र और अली सरदार जाफरी से हुई. इसके बाद गुलजार की किस्मत ही बदल गई. शैलेंद्र ही गुलजार को डायरेक्टर विमल रॉय के पास लेकर गए, जिसके बाद उन्हें ‘बंदिनी’ फिल्म के गाने को लिखने का मौका मिला और इस तरह बॉलीवुड में भी गुलजार ने धाक जमा ली.