कंपनियों की हायरिंग पॉलिसी और वैल्यू में चुपचाप परिवर्तन हुआ है. पहले कैंडिडेट्स को सिर्फ अपनी डिग्री दिखाने की जरूरत होती थी. लेकिन अब उन्हें ये प्रूफ देना होता है कि जिस पद के लिए वो अप्लाई कर रहे हैं, उसके वो काबिल हैं. इसका असर एजुकेशन सिस्टम पर भी होगा, यह बहुत ही जाहिर सी बात है. इसी बदलते समय के साथ शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की जरूरत पर शिक्षा मंत्री ने भी जोर दिया है. उन्होंने कहा कि अब सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि स्किल, एंटरप्रेन्योरशिप और व्यवहारिक ज्ञान भी जरूरी है.
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि अब पारंपरिक शिक्षा के साथ स्किल, एंटरप्रेन्योरशिप और अप्रेंटिसशिप पर जोर देना होगा. व्यवहारिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ये जरूरी है. हर इंडस्ट्री में ऐसे लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनके पास वास्तविक स्किल है, न कि सिर्फ डिग्री. शिक्षा मंत्री ने चेन्नई के जोहो एजुकेशन मॉडल की बात करते हुए कहा कि जोहो एजुकेशन में स्किल सीखने पर फोकस होता है. यहां स्टूडेंट्स को शुरुआत से ही इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जाता है.
बता दें कि आज के जॉब मार्केट में अलग दिखने के लिए एकेडमिक नॉलेज और प्रैक्टिकल, डिमांड वाली स्किल्स (हार्ड और सॉफ्ट दोनों) का मिक्सचर जरूरी है, क्योंकि एम्प्लॉयर ऐसे कैंडिडेट ढूंढते हैं जो तुरंत योगदान दे सकें, इसलिए शुरुआती एंट्री के अलावा करियर ग्रोथ के लिए लगातार स्किल डेवलपमेंट बहुत जरूरी है. डिग्री एक मजबूत नींव का काम करती है, लेकिन स्किल्स वे टूल्स हैं जो आपकी शिक्षा को एक कॉम्पिटिटिव, तेजी से बदलती प्रोफेशनल दुनिया में वैल्यूएबल बनाती हैं.
टेक्नोलॉजी और AI के साथ स्किल
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि विकसित अर्थव्यवस्था में टेकनालॉजी और वर्कफोर्स दोनों का मजबूत होना जरूरी है. आने वाले समय में पढ़ाने के तरीके में बदलाव होगा. क्योंकि आने वाले समय में AI, एजुकेशन का हिस्सा बन जाएगा, जिससे एजुकेशन और भी ज्यादा प्रैक्टिकल बन जाएगा और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बन जाएगा. धर्मेंद्र प्रधान ने क्लियर संदेश देने की कोशिश की है कि डिग्री के साथ स्किल्स जरूरी हैं, स्टडी के साथ इनोवेशन और नॉलेज के साथ समझ बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि इसी अप्रोच के साथ विकसित राष्ट्र की मजबूत नींव रखी जा सकती है.










