Siddharth Sharma
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नई दिल्ली: नीट 2023 के नतीजे आने से पहले राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग(NMC) ने एमबीबीएस कोर्स के नियमों में बड़ा बदलाव किया है जिसका छात्रों पर सीधा असर पड़ने वाला है। नेशनल मेडिकल कमीशन द्वारा जारी नए नियमों के मुताबिक एमबीबीएस करने वाले छात्रों को एडमिशन की तारीख से 9 साल के भीतर कोर्स पूरा करना होगा। उन्हें फर्स्ट ईयर की परीक्षा पास करने के लिए सिर्फ 4 मौके दिए जाएंगे।
एनएमसी ने गजट अधिसूचना में कहा है कि ‘किसी भी परिस्थिति में, छात्र को प्रथम वर्ष (एमबीबीएस) के लिए चार से अधिक प्रयासों की अनुमति नहीं दी जाएगी और किसी भी छात्र को पाठ्यक्रम में प्रवेश की तारीख से नौ साल बाद स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रम जारी रखने की भी अनुमति नहीं दी जाएगी।’
चिकित्सा आयोग द्वारा जारी किए गए आदेश में ये सपष्ट कर दिया गया है कि सभी मेडिकल कॉलेजों के लिए एक ही काउंसलिंग आयोजित की जाएगी। इसका आयोजन नीट यूजी के नतीजें आने के बाद किया जाएगा। गजट में कहा गया है कि “वर्तमान रेगुलेशन या अन्य एनएमसी रेगुलेशन में कही गई किसी भी बात के पूर्वाग्रह के बिना, नीट-यूजी की मेरिट लिस्ट के आधार पर भारत में सभी मेडिकल संस्थानों के लिए मेडिकल में ग्रेजुएट कोर्सों में एडमिशन के लिए सामान्य काउंसलिंग होगी।”
एनएमसी ने ये भी कहा कि इंडिया या इंडिया के बाहर मेडिकल डिग्री लेने के लिए यानी एमबीबीएस करने के लिए कैंडिडेट्स का नीट यूजी परीक्षा पास करना जरूरी है। नये रेग्यूलेशंस में एनएमसी ने साफ किया कि नेशनल एलिजबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट यानी नीट यूजी एग्जाम ही पास करना होगा। इसी के बेसिस पर इंडिया और इसके बाहर के देशों में एडमिशन मिलेगा।
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