अमेरिका में रह रहे लाखों भारतीय परिवारों की नींद उड़ाने वाली एक बड़ी खबर सामने आ रही है. ट्रम्प प्रशासन ने एक बार फिर H-4 वीजा धारकों (H-1B वीजा धारकों के पति/पत्नी) के वर्क परमिट (EAD) को खत्म करने के प्रस्ताव को ठंडे बस्ते से बाहर निकाल लिया है.
अगर यह प्रस्ताव कानून का रूप लेता है, तो इसका सबसे बड़ा झटका अमेरिका में बसे भारतीय परिवारों को लगेगा, क्योंकि वहां दोहरी कमाई (Double Income) पर निर्भर परिवारों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा सकता है. आइए समझते हैं कि अमेरिका का नया प्रस्ताव क्या है और भारतीय परिवारों पर इसका क्या असर पड़ेगा.
क्या है H-4 EAD और ट्रम्प प्रशासन का नया प्रस्ताव?
क्या होता है H-4 EAD?: साल 2015 में ओबामा प्रशासन ने एक नियम बनाया था. इसके तहत H-1B वीजा धारकों के पति या पत्नी (H-4 वीजा होल्डर) को अमेरिका में नौकरी करने का अधिकार (Work Permit / EAD) दिया गया था. शर्त सिर्फ इतनी थी कि उनके जीवनसाथी का ग्रीन कार्ड (I-140) प्रोसेस में होना चाहिए.
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क्या है नया प्रस्ताव?: यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने अपने रेगुलेटरी एजेंडे में Removing H-4 Dependent Spouses From Employment Authorisation नाम से एक प्रस्ताव शामिल किया है. इसका मकसद 2015 के नियम को रद्द कर H-4 वीजा धारकों से काम करने का हक छीनना है.
भारतीय परिवारों पर ही सबसे ज्यादा असर क्यों?
अमेरिकी आंकड़ों के मुताबिक, इस कदम की सबसे बड़ी गाज भारतीयों पर ही गिरेगी. एक रिपोर्ट के अनुसार, 2014 से 2017 के बीच जितने भी H-4 वर्क परमिट मंजूर हुए, उनमें से 93% से ज्यादा भारतीय नागरिक थे. इनमें करीब 94% महिलाएं शामिल हैं, जो आईटी, मेडिकल, एजुकेशन और एसटीईएम (STEM) जैसे क्षेत्रों में शानदार करियर बना रही हैं. भारतीयों को अमेरिका में ग्रीन कार्ड मिलने में दशकों का समय लग जाता है. ऐसे में H-4 EAD ही भारतीय महिलाओं को नौकरी करने और घर में दूसरी इनकम (Second Income) लाने का जरिया देता है.
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क्या आज ही बंद हो गए वर्क परमिट?
अगर आपके घर में भी कोई H-4 EAD पर काम कर रहा है, तो फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है. यह केवल एक प्रस्तावित विचार (Long-Term Action) है. अभी इसका औपचारिक ड्राफ्ट (NPRM) भी जारी नहीं हुआ है.
नियम बदलने के लिए सरकार को पहले नोटिफिकेशन जारी करना होगा, आम जनता से राय (Public Comments) लेनी होगी और फिर अंतिम नियम बनाना होगा. ट्रम्प के पिछले कार्यकाल में भी इस नियम को खत्म करने की कोशिश की गई थी, लेकिन कानूनी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण 2021 में इस फाइल को बंद कर दिया गया था.
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