---विज्ञापन---

बिजनेस angle-right

70 घंटे के काम के बाद AI का खतरा! नारायण मूर्ति की युवाओं को बड़ी चेतावनी

मूर्ति का मानना है कि भारत के पास युवाओं की सबसे बड़ी आबादी है, लेकिन यह एक चुनौती भी है. अगर ये युवा AI के दौर में स्किल्ड नहीं हुए, तो यह आबादी डेमोग्राफिक डिजास्टर में बदल सकती है.

---विज्ञापन---

नारायण मूर्ति के बयान अक्सर चर्चा और बहस का केंद्र बनते हैं. 70 घंटे के काम वाली टिप्पणी के बाद, उनका AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को लेकर दिया गया नजरिया युवाओं के लिए एक वेक-अप कॉल की तरह है. मूर्ति का AI को लेकर कोई नकारात्मक या डरावना नजरिया नहीं है, बल्कि यह अस्तित्व की लड़ाई (Survival of the fittest) पर आधारित एक व्यावहारिक सलाह है.

नारायण मूर्ति के बयान अक्सर चर्चा और बहस का केंद्र बनते हैं. 70 घंटे के काम वाली टिप्पणी के बाद, उनका AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को लेकर दिया गया नजरिया युवाओं के लिए एक वेक-अप कॉल की तरह है. मूर्ति का AI को लेकर कोई नकारात्मक या डरावना नजरिया नहीं है, बल्कि यह अस्तित्व की लड़ाई (Survival of the fittest) पर आधारित एक व्यावहारिक सलाह है. मूर्ति का मानना है कि AI कोई ऐसी बला नहीं है जो नौकरियां छीन लेगी, बल्कि यह उन लोगों की नौकरियों को खतरा है जो AI का इस्तेमाल नहीं करना जानते.

---विज्ञापन---

Railway Pensioners Alert: सरकार ने जारी की सख्त चेतावनी, लाखों इंडियन रेलवे पेंशनर्स के लिए बड़ा अपडेट

उत्पादकता (Productivity) का नया मानक

नारायण मूर्ति का तर्क है कि भारत को विकसित देश बनने के लिए असाधारण उत्पादकता की जरूरत है. उनका मानना है कि AI काम की रफ्तार को कई गुना बढ़ा सकता है. जो युवा AI के साथ तालमेल नहीं बिठाएंगे, वे ग्लोबल मार्केट में पिछड़ जाएंगे. अगर आप आज भी पुराने तरीके से काम कर रहे हैं और नई तकनीक (AI) नहीं सीख रहे हैं, तो आप अपनी जगह खोने के लिए खुद जिम्मेदार होंगे.

---विज्ञापन---

सफाई कर्मचारी को 2 लाख रुपये और इंजीनियर को 7 लाख!

कठिन परिश्रम और AI का संगम
उन्होंने अपने 70 घंटे वाले बयान को स्पष्ट करते हुए यह जोड़ा है कि AI के आने से मेहनत की परिभाषा बदल गई है. अब आपको लंबी मेहनत के साथ-साथ स्मार्ट मेहनत करनी होगी. उन्होंने बार-बार दोहराया है कि तकनीक (AI) एक सहायक है, न कि मानवीय बौद्धिकता (Human Intellect) का विकल्प.

---विज्ञापन---

भारत का डेमोग्राफिक डिविडेंड
मूर्ति का मानना है कि भारत के पास युवाओं की सबसे बड़ी आबादी है, लेकिन यह एक चुनौती भी है. अगर ये युवा AI के दौर में स्किल्ड नहीं हुए, तो यह आबादी डेमोग्राफिक डिजास्टर में बदल सकती है.

क्या मूर्ति युवाओं को डरा रहे हैं?
बिल्कुल नहीं. इसे एक चेतावनी के बजाय एक अनिवार्यता (Imperative) के रूप में देखना चाहिए. उनका मैसेज बहुत आसान है क‍ि एआई के दौर में केवल डिग्री काफी नहीं है. आपको सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, डेटा एनालिटिक्स और एआई टूल्स में महारत हासिल करनी ही होगी. मूर्ति के अनुसार, भविष्य में वही टिकेगा जो अपनी बौद्धिक क्षमता और तकनीक का सही संतुलन बना पाएगा.

---विज्ञापन---

First published on: Feb 27, 2026 11:20 AM

End of Article

About the Author

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती, BAG नेटवर्क के माल‍िकाना हक वाले News 24 के साथ स‍ितंबर 2025 से कार्यरत हैं। मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं। News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबर लिखने के साथ-साथ एजुकेशन की भी जिम्मेदारी संभालती हैं। बी.कॉम की पढ़ाई द‍िल्‍ली यून‍िवर्स‍िटी से की है और YMCA, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

Read More

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती, BAG नेटवर्क के माल‍िकाना हक वाले News 24 के साथ स‍ितंबर 2025 से कार्यरत हैं। मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं। News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबर लिखने के साथ-साथ एजुकेशन की भी जिम्मेदारी संभालती हैं। बी.कॉम की पढ़ाई द‍िल्‍ली यून‍िवर्स‍िटी से की है और YMCA, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है।

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola