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Sovereign Gold Bond Scheme: केंद्र सरकार ने कुछ साल पहले सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य लोगों को फिजिकल गोल्ड से डिजिटल गोल्ड पर शिफ्ट करना था। SGB के माध्यम से सरकार ने लोगों को अपेक्षाकृत सस्ते में सोने में निवेश का मौका दिया। हालांकि, अब सरकार ने इस योजना से तौबा कर ली है। माना जा रहा है कि फरवरी में पेश होने वाले बजट में इसकी समाप्ति की घोषणा हो सकती है।

भारी पड़ रही योजना

ऐसे में यह सवाल लाजमी ही कि आखिर सरकार ऐसा क्यों कर रही है? इसका जवाब है – बोझ। सरकार के लिए यह योजना अब बोझ साबित हो रहा है। लोगों को सस्ते में सोने में निवेश का मौका देना अब सरकार को आर्थिक लिहाज से भारी पड़ रहा है। सरकार अपने लोन-टू-GDP रेश्यो को कम करने के प्रयासों के तहत सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना को बंद करने पर विचार कर रही है।

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कैसे बढ़ा सरकार का बोझ?

सरकार से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना ने अपने प्रारंभिक उद्देश्य को हासिल कर लिया है। इस योजना के चलते सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। चलिए अब यह भी समझ लेते हैं कि आखिर ये दबाव क्या है? दरअसल, इस योजना में निवेश करने वालों को बॉन्ड अवधि समाप्त होने पर सोने के समकक्ष मूल्य का भुगतान करना पड़ता है। सोने की कीमतें तेजी से भाग रही हैं, ऐसे में सरकार की वित्तीय देनदारियां बढ़ रही हैं और उसके खजाने पर दबाव आ रहा है।

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बस घोषणा का इंतजार

माना जा रहा है कि सरकार इस योजना को बंद करने का मन बना चुकी है और बस घोषणा बाकी है। इसकी पूरी संभावना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण FY26 के बजट में SGB योजना को बंद करने का ऐलान कर दें। वित्त मंत्री ने कुछ वक्त पहले वित्तीय घाटे को FY26 तक 4.5% से नीचे रखने की प्रतिबद्धता दोहराई थी, ऐसे में सरकार SGB पर ताला लगाकर अपने आर्थिक बोझ को कुछ कम कर सकती है।

सुनाई दी थी आहट

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना बंद होने की आहट तभी सुनाई देने लगी थी जब सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025 के बजट में इसके लिए आवंटन घटकर 18,500 करोड़ रुपए कर दिया गया था। जबकि FY24 के लिए यह आंकड़ा 26,852 करोड़ रुपए था। पहले, इस योजना की एक साल में 10 किस्तें जारी होती थीं, फिर चार और उसके बाद यह संख्या घटकर 2 रह गई। बीते कुछ समय से RBI द्वारा इसकी कोई नई किश्त जारी नहीं की गई है।

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छूट भी मिलती थी

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड योजना की शुरुआत 2015 में हुई थी। चूंकि यह बॉन्ड RBI जारी करता था, इसलिए किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई आशंका नहीं रहती थी। यही वजह रही कि लोगों ने जमकर इसमें पैसा लगाया। इस योजना के तहत निवेश पर सालाना 2.5% ब्याज मिलता है। ऑनलाइन या डिजिटल Gold Bond खरीदने वाले निवेशकों को प्रति ग्राम 50 रुपए की छूट दी जाती थी। गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने के लिए कम से कम 1 ग्राम सोना खरीदना अनिवार्य था।

First published on: Dec 13, 2024 10:59 AM

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