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बिजनेस

रूसी तेल की कीमतों ने भारत में तोड़ा रिकॉर्ड, महंगा क्रूड ऑयल बेचकर कितनी कमाई कर रहे पुतिन?

रूस से आने वाले कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गई हैं, जिससे भारत को अब पहले से ज्यादा महंगा तेल खरीदना पड़ रहा है. अमेरिका की अस्थायी छूट और मध्य-पूर्व में जारी तनाव की वजह से वैश्विक तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है.

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Written By: Varsha Sikri Updated: Mar 16, 2026 22:51
Iran Israel War
Credit: News24

रूस से आने वाले कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक रूस का प्रमुख यूराल क्रूड अब रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया है और भारत को ये तेल 2022 में शुरू हुए यूक्रेन युद्ध के बाद सबसे महंगा पड़ रहा है. दरअसल, यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे. उस समय रूस ने एशियाई देशों, खासकर भारत और चीन को सस्ता तेल बेचना शुरू किया था. भारत ने भी इस मौके का फायदा उठाते हुए बड़ी मात्रा में रूसी तेल आयात किया और अपनी रिफाइनरियों के लिए इसे फायदेमंद सौदा बनाया. लेकिन अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं.

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रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची कीमत

ऊर्जा डेटा फर्म Argus Media के मुताबिक, भारत पहुंचने वाला रूसी यूराल कच्चा तेल लगभग 98.93 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जिसमें शिपिंग खर्च भी शामिल है. ये पिछले कई सालों में सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के पश्चिमी बंदरगाहों पर इस तेल की औसत कीमत करीब 73.73 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई, जो जुलाई 2024 के बाद सबसे ज्यादा है. ये रूस के बजट अनुमान से भी काफी ज्यादा है. तेल की कीमतों में तेजी का एक बड़ा कारण अमेरिका द्वारा दी गई अस्थायी छूट है. अमेरिका ने 30 दिनों के लिए दुनिया के देशों को समुद्र में मौजूद रूसी तेल खरीदने की इजाजत दी है ताकि वैश्विक ऊर्जा संकट को कम किया जा सके. इस फैसले के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने तेजी दिखाते हुए लगभग 3 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल खरीद लिया. बताया जा रहा है कि ये तेल पहले से टैंकरों में लदा हुआ था और खरीदार नहीं मिलने की वजह से समुद्र में पड़ा हुआ था.

मध्य-पूर्व युद्ध का भी असर

मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष की वजह से भी वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हुई है. खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव बढ़ने से तेल की आपूर्ति में रुकावट हुई और कीमतें तेजी से बढ़ने लगीं. इन हालातों ने रूस के तेल की मांग को और बढ़ा दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय बढ़ी हुई कीमतों से रूस को भारी आर्थिक फायदा हो सकता है. हालांकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि तेल की कीमतों में ये उछाल स्थायी नहीं है और कंपनियों को भविष्य को ध्यान में रखकर योजना बनानी चाहिए. कुल मिलाकर, ग्लोबल वॉर के बीच तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है. भारत के लिए चुनौती ये है कि वो अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करते हुए बढ़ती कीमतों के असर को कैसे संतुलित करे.

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First published on: Mar 16, 2026 10:51 PM

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