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कल से कुछ मजबूत हुआ रुपया, लेकिन Dollar के मुकाबले अच्छी नहीं है सेहत

Rupee Saw Some Recovery: एक तरफ जहां शेयर बाजार में गिरावट है, वहीं डॉलर के मुकाबले रुपये की सेहत भी अच्छी नहीं चल रही है। हालांकि, सुकून की बात बस इतनी है कि कल के मुकाबले आज इसने कुछ रिकवरी की है।

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Dollar Vs INR: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की सेहत अच्छी नहीं है। रुपया अमेरिकी डॉलर की तुलना में पहली बार 85 के पार पहुंच गया है। 20 दिसंबर के शुरुआती कारोबार में रुपया 85.07 पर नजर आया। 19 दिसंबर के मुकाबले इसने कुछ रिकवरी की है, लेकिन फिर भी इसकी सेहत कमजोर बनी हुई है। रुपये में कल आई गिरावट की वजह वही डर बताया जा रहा है, जिसके चलते अमेरिकी शेयर बाजार लाल हो गया था।

इस वजह से निराशा

यूएस फेडरल रिजर्व ने नीतिगत ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है और इसी की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने 2025 में कटौती को लेकर जो संकेत दिए, उससे निराशा का माहौल बना। माना जा रहा है कि 2025 में 4 की जगह केवल 2 बार ही नीतिगत ब्याज दरों में कटौती हो सकती है। इसी के चलते अमेरिकी शेयर बाजार में भूचाल आया था और भारतीय बाजार भी लाल हुआ।

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यह भी पढ़ें – अमेरिका के असर से लाल हुआ Stock Market, अब यहां से कहां जाएगा बाजार?

गिरावट की आशंका

एक्सपर्ट्स का मानना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में कल आई कमजोरी की वजह भी अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर उपजी आशंका है। उनका यह भी कहना है कि शेयर मार्केट में गिरावट से रुपये पर दबाव बढ़ गया है। अगर बाजार में बिकवाली जारी रहती है, तो इससे डॉलर की मांग बढ़ेगी और रुपया अत्यधिक दबाव में आ जाएगा। लिहाजा, आने वाले सत्रों में रुपये के और कमजोर होने की आशंका है।

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लगातार दबाव में रुपया

भारतीय रुपया पिछले कुछ महीनों से दबाव का सामना कर रहा है। इसकी वजह है, भारतीय अर्थव्यवस्था की सुस्ती, शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों का लगातार पैसा निकालना और दुनिया की प्रमुख करेंसी के मुकाबले डॉलर में आ रही मजबूती। ऐसे में अमेरिका से आई खबर ने रुपये की सेहत को और नाजुक करने वाला काम किया। अगर गिरावट का सिलसिला आगे भी चलता रहा, तो भारत को कई मोर्चों पर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

इस तरह होगा असर

रुपये की कमजोरी का सबसे बड़ा असर आयात पर पड़ता है। कंपनियों को गुड्स एवं सर्विसेज के आयात के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। इससे दूसरे देशों से आयात किया जाने वाला सामान महंगा हो जाएगा। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में रुपये में गिरावट से उसका आयात का बिल बढ़ेगा और इसकी भरपाई आम जनता से की जा सकती है। इसी तरह, रुपये की कमजोरी से विदेश में पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स का खर्च बढ़ जाएगा। हालांकि, डॉलर में मजबूती से निर्यातकों को जरूर फायदा होगा।

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First published on: Dec 20, 2024 01:07 PM

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