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बिजनेस

Rupee at All-time Low: रुपया पहली बार 95 के पार; भारतीय मुद्रा के इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आज का दिन ऐतिहासिक उथल-पुथल भरा रहा। एक तरफ जहां रुपया (Rupee) पहली बार 95 प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया, वहीं भारत की 10 साल के बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) भी 21 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।

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Written By: Vandana Bharti Updated: Mar 30, 2026 16:22

भारतीय मुद्रा बाजार (Forex Market) में आज कोहराम मच गया। सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 95.14 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर जा गिरा। यह पहली बार है जब भारतीय रुपया 95 के स्तर के पार निकला है। अकेले इस मार्च तिमाही में रुपया डॉलर के मुकाबले 4.4% तक कमजोर हो चुका है।

RBI की सख्ती और सट्टेबाजी पर लगाम

शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद आरबीआई (RBI) ने बैंकों के लिए नेट ओपन फॉरेक्स पोजीशन की सीमा $100 मिलियन तय कर दी थी। बैंकों को इसे 10 अप्रैल तक लागू करना है। हालांकि इस कदम का उद्देश्य सट्टेबाजी रोकना है, लेकिन बाजार के जानकारों का मानना है कि इतनी कम समय सीमा (Deadline) की वजह से बाजार में अफरा-तफरी मची है और पोजीशन अनवाइंडिंग के कारण रुपया दबाव में है।

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बॉन्ड मार्केट में 21 महीने का रिकॉर्ड टूटा
रुपये में गिरावट का असर सरकारी बॉन्ड मार्केट पर भी दिखा। भारत की 10-वर्षीय बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड आज 7.0121% पर पहुंच गई। जुलाई 2024 के बाद यह पहली बार है जब यील्ड ने 7% का स्तर पार किया है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने का सीधा मतलब है कि सरकार के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा, जिसका असर आने वाले समय में बैंकों की ब्याज दरों और आपकी EMI पर पड़ सकता है।

कच्चे तेल की दोहरी मार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के $116 के पार जाने से भारत के व्यापार घाटे (Trade Deficit) के बढ़ने की आशंका गहरा गई है। तेल आयात के लिए भारी मात्रा में डॉलर की जरूरत ने रुपये की मांग को कमजोर और डॉलर को मजबूत कर दिया है।

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First published on: Mar 30, 2026 03:30 PM

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