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Stock Market Bloodbath: विदेशी निवेशकों ने मार्च में बेचे 1 लाख करोड़ रुपये के शेयर; भारतीय बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा पलायन

ईरान युद्ध और वैश्विक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों (FPIs) के पलायन ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अकेले मार्च के महीने में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 12 बिलियन डॉलर (लगभग ₹1 लाख करोड़) की भारी-भरकम राशि निकाल ली है।

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Share Market : भारतीय शेयर बाजार इस वक्त अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, 25 मार्च तक विदेशी निवेशकों ने शुद्ध रूप से 11.7 बिलियन डॉलर की निकासी की है, जो महीने के अंत तक 12 बिलियन डॉलर को पार कर गई है। यह एक महीने में होने वाला अब तक का सबसे बड़ा ‘एग्जिट’ (Exodus) है।

क्‍यों न‍िकल रहे हैं व‍िदेशी न‍िवेशक

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल युद्ध ही नहीं, बल्कि कई आंतरिक कारक भी इसके लिए जिम्मेदार हैं:

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    तेल का झटका: भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। युद्ध के कारण ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने भारत की विकास दर (Growth Outlook) पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    कमजोर रुपया: डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत ने विदेशी फंड्स के मुनाफे को कम कर दिया है।

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    महंगा वैल्युएशन: युद्ध से पहले भी भारतीय शेयरों की कीमतें (Valuations) काफी ज्यादा थीं, जिससे निवेशकों को मुनाफावसूली का बहाना मिल गया।

    इंडिया स्टोरी की चमक हुई फीकी?
    फिलहाल तस्वीर काफी निराशाजनक है। कंपनियों की कमजोर कमाई और स्थानीय मांग में सुस्ती ने निवेशकों के भरोसे को तोड़ा है। गोल्डमैन सैक्स, मॉर्गन स्टेनली और यूबीएस (UBS) जैसी दिग्गज वैश्विक संस्थाओं ने भी भारतीय बाजार के लिए अपने अनुमान घटा दिए हैं।

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    घरेलू निवेशकों (DIIs) ने संभाला मोर्चा
    विदेशी निवेशकों की अंधाधुंध बिकवाली के बीच भारतीय संस्थागत निवेशकों (जैसे म्यूचुअल फंड और LIC) ने बाजार को सहारा देने की कोशिश की है। मार्च में घरेलू निवेशकों ने 13 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है, लेकिन विदेशी फंड्स की लगातार बिकवाली के आगे यह सपोर्ट भी बाजार में बड़ी रिकवरी लाने में नाकाम रहा है।

    चार साल के उच्च स्तर पर डर (Volatility Index)
    बाजार में अनिश्चितता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि NSE Volatility Index (VIX) चार साल के उच्चतम स्तर पर कारोबार कर रहा है। अगर शांति वार्ता में देरी हुई, तो स्थिति स्टैगफ्लेशन (महंगाई और मंदी का मेल) की ओर बढ़ सकती है।

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      First published on: Mar 30, 2026 08:08 AM

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      About the Author

      Vandana Bharti

      वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.

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