जब भी आप किसी बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या पैसे जमा करते हैं, तो सबसे पहले बैंक की सुरक्षा और ब्याज दरें देखते हैं. बड़ी कंपनियां और संस्थाएं तो बैंक की क्रेडिट रेटिंग देखकर ही तय करती हैं कि पैसा किस बैंक में रखना सुरक्षित रहेगा. लेकिन अब बैंक डिपॉजिट की रेटिंग को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और मार्केट रेगुलेटर SEBI के नियमों के बीच ऐसा पेच फंस गया है, जिसने रेटिंग एजेंसियों (CRAs) के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है. आइए समझते हैं कि पूरा मामला क्या है और इससे क्या बदलाव आ सकते हैं.
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RBI ने ऐसा क्या कहा जिससे हलचल मच गई है?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, RBI ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों से कहा है कि वे बैंक डिपॉजिट की रेटिंग रिपोर्ट और दस्तावेजों में RBI को इस जमा का रेगुलेटर (Regulator) न बताएं. केंद्रीय बैंक ने अभी तक यह सार्वजनिक नहीं किया है कि उसने ऐसा निर्देश क्यों दिया है. RBI ने फिलहाल बैंक डिपॉजिट की रेटिंग करने से मना नहीं किया है, विवाद सिर्फ इस बात का है कि रिपोर्ट में रेगुलेटर के तौर पर RBI का नाम लिखा जाए या नहीं.
SEBI के नियम ने कैसे बढ़ाई उलझन?
असली परेशानी SEBI के 10 फरवरी वाले एक सर्कुलर से शुरू होती है. जिसमें कहा गया है कि अगर कोई रेटिंग एजेंसी किसी ऐसे वित्तीय प्रॉडक्ट की रेटिंग करती है जो किसी दूसरे नियामक (जैसे RBI) के दायरे में आता है, तो रिपोर्ट में उस नियामक का नाम लिखना अनिवार्य है. रेटिंग एजेंसियों को यह भी बताना होता है कि ऐसे मामलों में SEBI का निवेशक सुरक्षा तंत्र (Investor Protection) लागू नहीं होगा.
SEBI कहता है कि नियामक का नाम लिखो और RBI कहता है कि हमारा नाम मत लिखो. ऐसे में रेटिंग एजेंसियां समझ नहीं पा रही हैं कि वे दोनों केंद्रीय संस्थानों के नियमों का एक साथ पालन कैसे करें.
क्या होती है बैंक डिपॉजिट रेटिंग?
यह रेटिंग आम जनता और कंपनियों को यह समझने में मदद करती है कि बैंक में जमा उनका पैसा कितना सुरक्षित है. CRISIL, ICRA जैसी रेटिंग एजेंसियां बैंक की संपत्ति, पूंजी, नकदी और मैनेजमेंट को देखकर यह रेटिंग देती हैं. आम ग्राहक भले ही इसे कम देखें, लेकिन बड़ी कंपनियां, ट्रस्ट और सरकारी संगठन उन्हीं बैंकों में बड़ी रकम जमा करते हैं जिनकी रेटिंग सबसे अच्छी (जैसे AAA) होती है.
अगर RBI और SEBI मिलकर इस असमंजस को दूर नहीं करते हैं, तो आने वाले समय में रेटिंग एजेंसियां बैंकों के डिपॉजिट की रेटिंग करना बंद भी कर सकती हैं. फिलहाल पूरी इंडस्ट्री को SEBI की तरफ से आने वाले किसी स्पष्टीकरण या RBI के अगले कदम का इंतजार है.
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