Monetary Policy RBI: देश में इस समय महंगाई देखी जा रही है। आम नागरिक महंगाई से परेशान नजर आ रहा है। कच्चे तेलों में बढ़ोतरी के चलते देश के कई सेक्टर में महंगाई धीरे-धीरे अपने पैर पसार रही है। हालांकि ऐसा नहीं है कि देश की सरकार या फिर आरबीआई की तरफ से कुछ नहीं किया जा रहा है। दरअसल मॉनेटरी पॉलिसी के लिए आरबीआई ने अपने प्लान पर काम करना शुरु कर दिया है। आज से तीन दिन के लिए आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी के लिए मीटिंग करेगा। जिसके बाद से तय होगा कि देश की महंगाई के लिए क्या कड़े नियम बनाए जाएं।

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जीडीपी के मोर्चे पर देश है आगे

जीडीपी की बात करें तो इकोनॉमिक ग्रोथ 6.3 फीसदी तक देश की हो सकती है। इसके लिए आरबीआई के साथ-साथ विश्व बैंक भी भारत की तारीफ कर चुका है। पर इसके इत्तर देश में महंगाई एक बड़ा मुद्दा देखने को मिल सकता है। पिछली बार जब आरबीआई की तरफ से मॉनेटरी पॉलिसी जारी की गई थी, तब इसमें कोई बदलाव नहीं किया था। ये पिछले 6 बार में पहली बार था कि मॉनेटरी पॉलिसी में कोई भई बदलाव नहीं किया गया हो।

क्या रह सकती है आरबीआई की प्लानिंग

जैसा आप जानते हैं कि मॉनेटरी पॉलिसी के जरिए ही आरबीआई देश में बढ़ती महंगाई को काबू में करती है। रेपो रेट एक ऐसा जरिया है जिससे आम नागरिक की जेब पर सीधा असर पड़ता है। हालांकि अभी के हालत को देखते हुए कह सकते हैं कि रिजर्व बैंक पिछले समय के जैसे ही रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करे। अगर ऐसे हुआ तो लोन की ईएमआई में कोई भार आम आदमी पर नहीं देखने को मिलेगा।

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क्या होती है रेपो रेट

रेपो रेट की बात करें तो हम पहले ही बता चुके हैं कि इसका असर आम नागरिक की जेब पर पड़ता है। रेपो रेट वो रेट है जिस पर बैंक आरबीआई से लोन लेते हैं। अगर रेपो रेट में इजाफा होता है तो बैंक को महंगे रेट पर लोन मिलेगा। जिसके बाद वो आगे आम नागरिक को महंगे रेट में लोन देगा। इसलिए आरबीआई इसके जरिए मार्केट में डिमांड और सप्लाई को मेनटेन कर सकती है।

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