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‘पेट्रोल-डीजल का अब कोई भविष्य नहीं’, नितिन गडकरी की चेतावनी; वाहन कंपनियों को दिया अल्टीमेटम

Big Alert: नितिन गडकरी ने ऑटो इंडस्ट्री को झटका द‍िया है। दरअसल, उन्‍होंने कहा है क‍ि भारत में पेट्रोल-डीजल का भविष्य खत्म हो रहा है। 22 लाख करोड़ रुपये का आयात बिल और प्रदूषण के कारण अब हाइड्रोजन और इथेनॉल ही असली गेम चेंजर होंगे।

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केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ऑटोमोबाइल उद्योग को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि भारत में पेट्रोल और डीजल वाहनों का कोई भविष्य नहीं है। बसवर्ल्ड इंडिया कॉन्क्लेव 2026 में बोलते हुए उन्होंने विनिर्माताओं (OEMs) से आग्रह किया कि वे अपना ध्यान हाइड्रोजन, इथेनॉल और इलेक्ट्रिक जैसे स्वच्छ विकल्पों की ओर तेजी से स्थानांतरित करें।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने साफ कर दिया है कि डीजल और पेट्रोल इंजन जल्द ही इतिहास बन जाएंगे। उन्होंने ऑटोमोबाइल कंपनियों (OEMs) को आगाह किया कि यदि वे केवल इसी दिशा में विस्तार की योजना बना रहे हैं, तो उनका भविष्य संकट में है।

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22 लाख करोड़ का बोझ

गडकरी ने बताया कि भारत हर साल 22 लाख करोड़ रुपये का जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) आयात करता है। यह न केवल देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है, बल्कि प्रदूषण की मुख्य वजह भी है। भारत अब स्वदेशी और प्रदूषण मुक्त ईंधन की ओर बढ़ रहा है।

10 कॉरिडोर पर शुरू हुए पायलट प्रोजेक्ट
गडकरी ने हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन बताया। सरकार ने टाटा मोटर्स, वोल्वो और इंडियन ऑयल जैसे दिग्गजों के साथ मिलकर पुणे-मुंबई और ग्रेटर नोएडा-दिल्ली-आगरा जैसे 10 प्रमुख मार्गों पर हाइड्रोजन बसों और ट्रकों के परीक्षण शुरू कर दिए हैं।

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कचरे से बनेगा देश का ईंधन
भारत अब 20% इथेनॉल सम्मिश्रण (E20) के लक्ष्य को पूरा कर चुका है। गडकरी ने कहा कि अब लक्ष्य 100% इथेनॉल (E100) की ओर बढ़ना है। देश में टूटे हुए चावल, मक्का और बांस से इथेनॉल तैयार किया जा रहा है।

सस्ता नहीं, क्वालिटी पर ध्यान दें
गडकरी ने बस निर्माताओं से कहा कि वे केवल लागत (cost) कम करने के पीछे न भागें, बल्कि गुणवत्ता और सुरक्षा को प्राथमिकता दें। उन्होंने चेतावनी दी कि अब बस पंजीकरण के लिए Vahan पोर्टल पर फिजिकल और वीडियो वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा।

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इलेक्ट्रिक बसों की भारी डिमांड
देश में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन की मांग तेजी से बढ़ रही है। गडकरी के अनुसार, अगले 3 वर्षों में अकेले इलेक्ट्रिक बसों की मांग 1.5 लाख यूनिट तक पहुंच सकती है। वर्तमान में विनिर्माण क्षमता लगभग 70,000 बसें प्रति वर्ष है।

First published on: Apr 29, 2026 12:41 PM

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About the Author

Vandana Bharti

BAG नेटवर्क के माल‍िकाना हक वाले News 24 में बतौर DNE नई शुरुआत करने से पहले मैं, News18 में कॉन्‍ट्रीब्‍यूटर रही. DU के खालसा कॉलेज और YMCA (2005-06) से पढ़ाई करने के बाद मैंने साल 2007 में दैन‍िक जागरण अखबार (फीचर) से अपने कर‍ियर की शुरुआत की. फ‍िर देशबंधु (ब‍िजनेस पेज), ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार (ब‍िजनेस पेज), Aaj Tak ड‍िजिटल (कर‍ियर), News18 ड‍िज‍िटल (कर‍ियर), India.com (कर‍ियर और लाइफस्‍टाइल), Zee News ड‍िज‍िटल (लाइफस्‍टाइल और कर‍ियर) आद‍ि में काम कर चुकी हूं.

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