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सैलरी 20 लाख रुपये और टैक्स जीरो! न्यू टैक्स रिजीम में CA ने बताया टैक्स बचाने का फॉर्मूला

यह खबर उन लाखों नौकरीपेशा लोगों के लिए किसी बड़े सरप्राइज से कम नहीं है, जो 20 लाख रुपये के पैकेज पर भारी-भरकम टैक्स कटने के डर में रहते हैं। अक्सर माना जाता है कि नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) में बचत की कोई गुंजाइश नहीं है, लेकिन चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की गणित कुछ और ही कहती है। जान‍िये 20 लाख रुपये की सैलरी को जीरो टैक्स के दायरे में कैसे ला सकते हैं?

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अगर आपसे कोई कहे कि 20 लाख रुपये सालाना कमाने के बाद भी आपको सरकार को एक रुपया टैक्स नहीं देना होगा, तो शायद आपको यकीन न हो। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 12.75 लाख रुपये (स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ) तक की आय को तो टैक्स फ्री कर ही दिया है, लेकिन अगर आप थोड़ा दिमाग लगाएं और अपनी कंपनी के साथ मिलकर सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव करें, तो 20 लाख रुपये का पैकेज भी पूरी तरह टैक्स फ्री हो सकता है।

सारा खेल सैलरी स्ट्रक्चर का है

न्यू टैक्स रिजीम में धारा 80C या 80D जैसी छूट नहीं मिलती, लेकिन यहां कॉस्ट टू कंपनी (CTC) के कंपोनेंट्स बड़े काम आते हैं। जानकारों के अनुसार, अगर आप नौकरी बदल रहे हैं या इंक्रीमेंट का समय है, तो HR से बात करके यहां बताए जा रहे बदलावों को शामिल करवाएं।

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कैसे काम करता है 20 लाख रुपये वाला कैलकुलेशन?
मान लीजिए आपकी CTC 20 लाख रुपये है। नए श्रम कोड के अनुसार, आपकी बेसिक सैलरी 10 लाख रुपये (50%) होनी चाहिए। अब देखें टैक्स कैसे बचता है:

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कार लीज (Car Lease): सबसे बड़ा गेमचेंजर है ये। अगर आप 8 लाख रुपये की कार 2 साल के लिए कंपनी के जरिए लीज पर लेते हैं, तो सालाना करीब 4.23 लाख रुपये आपकी टैक्सेबल इनकम से सीधे कम हो जाते हैं। यह खर्चा कंपनी के खाते में दिखता है और आपकी टैक्स लायबिलिटी घटा देता है।

NPS (नियोक्ता का योगदान): धारा 80CCD(2) के तहत कंपनी आपके NPS खाते में बेसिक सैलरी का 14% तक योगदान दे सकती है। 10 लाख रुपये की बेसिक पर यह करीब 1.4 लाख रुपये की अतिरिक्त टैक्स छूट दिलाता है।

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मील कूपन (Meal Benefit): हर रोज 400 रुपये (दो मील) के हिसाब से साल भर में करीब 1.05 लाख रुपये के मील कूपन टैक्स फ्री होते हैं।

PF और स्टैंडर्ड डिडक्शन: PF का 1.2 लाख रुपये और सरकार द्वारा दिया गया 75000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी इसमें जुड़ जाता है।

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(स्रोत: ClearTax)

HR से बात करना क्यों जरूरी है?
ऊपर दिए गए आंकड़ों से साफ है कि यदि आप कार लीज का विकल्प चुनते हैं, तो आपकी नेट टैक्सेबल इनकम 12 लाख रुपये से नीचे आ जाती है, जिससे न्यू टैक्स रिजीम की छूट के चलते आपका टैक्स जीरो हो जाता है। बिना कार लीज के भी आप 1.18 लाख टैक्स देकर 15.59 लाख रुपये की आय को सुरक्षित कर सकते हैं।

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बेस्‍ट तो ये होगा क‍ि आप नौकरी जॉइन करने से पहले ही सैलरी स्ट्रक्चर को टैक्स-फ्रेंडली बनवाएं। कंपनी के दिए गए कंपोनेंट्स का सही इस्तेमाल ही नई टैक्स व्यवस्था में असली बचत की चाबी है।

First published on: Apr 28, 2026 07:59 AM

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