Neeraj
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Mutual Fund News: शेयर बाजार में जारी गिरावट के बीच म्यूचुअल फंड निवेशक क्या करें, यह सबसे बड़ा सवाल है। सेंसेक्स अपने सितंबर के शिखर से काफी नीचे पहुंच गया है और निफ्टी ने भी गिरावट के मामले में 29 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। एक्सपर्ट्स का कहना निवेशकों को इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय लार्ज कैप या अच्छे फ्लेक्सी कैप, मल्टी-कैप और लार्ज व मिड-कैप फंड्स पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि निवेशकों को अपने लॉन्ग टर्म लक्ष्यों को ध्यान रखना चाहिए और मार्केट में शॉर्ट टर्म पर होने वाले बदलावों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि निवेशकों को SIP बंद नहीं करनी चाहिए। ET की रिपोर्ट में फाइनेंशियल रेडियंस के संस्थापक राजेश मिनोचा के हवाले से बताया गया है कि इक्विटी-आधारित म्यूचुअल फंड में निवेश न्यूनतम चार साल के लिए किया जाना चाहिए। जबकि शॉर्ट टर्म के लिहाज से हाइब्रिड या डेट फंड अच्छे हैं।
27 सितंबर को BSE सेंसेक्स 85,978 के उच्चतम स्तर पर था और फिर 4 मार्च को 72,989.93 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। पिछले छह महीनों में यह 9,211.23 अंक या 11.21% नीचे आया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मार्केट के इस करेक्शन ने डायरेक्ट इक्विटी निवेशकों और म्यूचुअल फंड मैनेजरों को पोर्टफोलियो में कांटछांट करने और मौलिक रूप से मजबूत कंपनियों पर जोर देने में सक्षम बनाया है। इस रणनीति के साथ लंबी अवधि के निवेश पर शानदार रिटर्न हासिल किया जा सकता है।
बाजार पर नजर रखने वालों का मानना है कि मौजूदा समय बेहतरीन स्टॉक को डिस्काउंट वैल्यूएशन पर अपने पोर्टफोलियो में शामिल करने का अवसर है। आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड के सीईओ फिरोज अजीज का कहना है कि निवेशकों के लिए अपने पोर्टफोलियो के लिए एसेट एलोकेशन पॉलिसी (Asset Allocation Policy) बनानी चाहिए, ताकि मार्केट की गिरावट को मैनेज किया जा सके। ET की रिपोर्ट के अनुसार, फिरोज अजीज का कहना है कि एसेट एलोकेशन रणनीति निवेशक को बाजार की अस्थिरता से निपटने में मदद कर सकती है।
एसेट एलोकेशन रणनीति के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि लॉन्ग टर्म के निवेशक के लिए इक्विटी और डेट में 80-20% का आवंटन सबसे अच्छा विकल्प होगा। मिड टर्म के निवेशक के लिए, इक्विटी और डेट में 70-30% का एलोकेशन बेहतर रहेगा, जबकि शॉर्ट टर्म के निवेशक के लिए 60-40% का दृष्टिकोण आदर्श है। वहीं, जिन्हें एक वर्ष से कम समय के लिए निवेश करना है, वह डेट फंड को चुन सकते हैं।
मार्केट की गिरावट ने सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को आशंकित कर दिया है। शायद यही वजह है कि लोग SIP बंद करने के बारे में न केवल सोच रहे हैं, बल्कि बाकायदा ऐसा कर भी रहे हैं। SIP का हिस्सा बनने वालों की संख्या भले ही बढ़ी हो, लेकिन इसे बंद करने वालों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।
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एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़े बताते हैं कि SIP स्टॉपेज रेश्यो पिछले साल 52.3% था , जो जनवरी 2025 में बढ़कर 109 प्रतिशत हो गया है। पिछले महीने यानी जनवरी में 56.19 लाख नए SIP रजिस्टर्ड हुए और 61.33 लाख निवेशकों ने SIP बंद की। इसका मतलब है कि जनवरी 2025 में नए SIP की तुलना में SIP बंद होने की संख्या अधिक रही।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार में लगातार गिरावट के कारण रिटेल इन्वेस्टर्स चिंतित हैं। आम निवेशकों के लिए अपने पोर्टफोलियो को रोजाना गिरते देखना बहुत मुश्किल है। इससे इक्विटी एसेट क्लास में उनका भरोसा डगमगा गया है, जबकि सोना और डेट जैसे दूसरे एसेट क्लास लगातार बेहतर रिटर्न दे रहे हैं। हालांकि, उनका कहना है कि लंबी अवधि के निवेश के लिए एसआईपी रोकना अच्छा कदम नहीं है।
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