ईरान-इज़रायल के बीच जारी तनाव का असर अब गुजरात के व्यापार पर साफ दिखाई देने लगा है. रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात के करीब 5,500 कंटेनर विदेशों के पोर्ट पर फंस गए हैं, जिससे निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.
जानकारी के अनुसार, ये कंटेनर यूएई के खोरफक्कन और ओमान के सोहार पोर्ट पर अटके हुए हैं. इन कंटेनरों को वापस भारत लाने में प्रति कंटेनर लगभग 5 लाख रुपये का खर्च आ सकता है. ऐसे में कुल नुकसान का आंकड़ा करीब 275 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है.
सबसे ज्यादा चिंता नाशवंत वस्तुओं को लेकर है. 800 से ज्यादा रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों में रखे खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्जियां, डेयरी उत्पाद और सी-फूड खराब होने की आशंका है, क्योंकि पर्याप्त स्टोरेज सुविधा नहीं मिल पा रही है.
इस संकट का असर सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है. रमजान के दौरान गुजरात से खाड़ी देशों में होने वाला करीब 1500 करोड़ रुपये का गारमेंट एक्सपोर्ट भी प्रभावित हो सकता है. वहीं, केसर आम जैसे फलों के करीब 500 करोड़ रुपये के निर्यात पर भी खतरा मंडरा रहा है, जिससे किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
इस तनाव से फलो के राजा आम भी नहीं बचा , आंकड़ों के अनुसार गुजरात से खाड़ी देशों में भेजी गई करीब 500 करोड़ रुपये की आम की खेप के कंटेनर फिलहाल फंसे हुए हैं. आम एक ‘नाशवंत वस्तु’ (जल्दी खराब होने वाला माल) होने के कारण 800 से अधिक कंटेनरों में रखा सामान खराब होने की पूरी आशंका है. जिसका सिद्ध नुक्सान बागायती खेती करने वाले किसानो को होना है.
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो यह नुकसान और बढ़ सकता है. पहले से ही शिपिंग रूट बाधित होने और लागत बढ़ने से निर्यात क्षेत्र दबाव में है. मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने गुजरात के निर्यात कारोबार को बड़ा झटका दिया है. ऐसे में उद्योग जगत सरकार से राहत पैकेज की मांग कर रहा है, ताकि इस संकट से उबरने में मदद मिल सके.
ईरान-इज़रायल के बीच जारी तनाव का असर अब गुजरात के व्यापार पर साफ दिखाई देने लगा है. रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात के करीब 5,500 कंटेनर विदेशों के पोर्ट पर फंस गए हैं, जिससे निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.
जानकारी के अनुसार, ये कंटेनर यूएई के खोरफक्कन और ओमान के सोहार पोर्ट पर अटके हुए हैं. इन कंटेनरों को वापस भारत लाने में प्रति कंटेनर लगभग 5 लाख रुपये का खर्च आ सकता है. ऐसे में कुल नुकसान का आंकड़ा करीब 275 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है.
सबसे ज्यादा चिंता नाशवंत वस्तुओं को लेकर है. 800 से ज्यादा रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों में रखे खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्जियां, डेयरी उत्पाद और सी-फूड खराब होने की आशंका है, क्योंकि पर्याप्त स्टोरेज सुविधा नहीं मिल पा रही है.
इस संकट का असर सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है. रमजान के दौरान गुजरात से खाड़ी देशों में होने वाला करीब 1500 करोड़ रुपये का गारमेंट एक्सपोर्ट भी प्रभावित हो सकता है. वहीं, केसर आम जैसे फलों के करीब 500 करोड़ रुपये के निर्यात पर भी खतरा मंडरा रहा है, जिससे किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
इस तनाव से फलो के राजा आम भी नहीं बचा , आंकड़ों के अनुसार गुजरात से खाड़ी देशों में भेजी गई करीब 500 करोड़ रुपये की आम की खेप के कंटेनर फिलहाल फंसे हुए हैं. आम एक ‘नाशवंत वस्तु’ (जल्दी खराब होने वाला माल) होने के कारण 800 से अधिक कंटेनरों में रखा सामान खराब होने की पूरी आशंका है. जिसका सिद्ध नुक्सान बागायती खेती करने वाले किसानो को होना है.
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो यह नुकसान और बढ़ सकता है. पहले से ही शिपिंग रूट बाधित होने और लागत बढ़ने से निर्यात क्षेत्र दबाव में है. मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने गुजरात के निर्यात कारोबार को बड़ा झटका दिया है. ऐसे में उद्योग जगत सरकार से राहत पैकेज की मांग कर रहा है, ताकि इस संकट से उबरने में मदद मिल सके.