Nitin Arora
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Indian Students: हाल ही में कुछ छात्रों को अमेरिका ने भारत वापस भेज दिया था। इसपर अब नई और बड़ी जानकारी सामने आई है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन छात्रों को संयुक्त राज्य अमेरिका से वापस भेजा गया था और जिन छात्रों का वीजा रद्द कर दिया गया था उन्हें देश में पांच साल के प्रवेश प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है।
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, इन छात्रों को कनाडा, UK और ऑस्ट्रेलिया जैसे अन्य अंतरराष्ट्रीय स्टडी वाली जगहों पर भी प्रवेश करने में भी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर वे छात्र भविष्य में एच1बी (H1B) वीजा पाना चाहते हैं तो यह उनके लिए लॉन्द टर्म प्रभाव पैदा कर सकता है, जब तक कि प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा इन छात्रों का समर्थन न किया गया।
वित्तीय रूप से, F1 वीजा रद्द करने से काफी नुकसान होता है। छात्रों को वीजा शुल्क, हवाई किराया, विश्वविद्यालय में अप्लाई फीस, सलाहकार शुल्क और अन्य कई अधिक सहित खर्चों का नुकसान उठाना पड़ सकता है। मानके चलें तो एक छात्र का खर्चा कुल मिलाकर लगभग ₹3 लाख हो सकता है।
अमेरिका ने एक ही दिन में इक्कीस भारतीय छात्रों को वापस भेज दिया। वीजा संबंधी दिक्कतों के कारण ऐसा किया गया। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के रहने वाले इनमें से कई छात्रों ने वीजा औपचारिकताएं पूरी कर ली थीं और उच्च शिक्षा हासिल करने की आकांक्षाओं के साथ अमेरिका पहुंचे थे। हालांकि, वहां जाकर परेशानी का सामना करना पड़ा।
रिपोर्टों से पता चला कि इन छात्रों को इमिग्रेशन अधिकारियों द्वारा गहन दस्तावेज जांच के बाद वापस भेज दिया गया। उस वक्त उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में भी लिया गया। ये घटनाएं अटलांटा, शिकागो और सैन फ्रांसिस्को के हवाई अड्डों पर हुईं।
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