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इस प्राइवेट बैंक ने बदले Loan Rates, जानें क‍िसको होगा फायदा; क‍िसको लगेगा झटका

HDFC बैंक के ग्राहकों के लिए एक मिली-जुली लेकिन राहत भरी खबर आई है। बैंक ने अपनी कर्ज दरों (MCLR) में बदलाव किया है, जिससे कुछ ग्राहकों की EMI कम होने वाली है। आइए आसान भाषा में समझते हैं इस पूरे बदलाव का गणित:

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Written By: Vandana Bharti Updated: May 8, 2026 15:57

अगर आपने देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक, HDFC से लोन ले रखा है, तो आज अपनी लोन की किस्तों (EMI) का हिसाब दोबारा चेक कर लीजिए। बैंक ने 7 मई 2026 से अपनी MCLR (Marginal Cost of Funds Based Lending Rate) की दरों में संशोधन किया है। बैंक ने चालाकी से कम अवधि वाले कर्ज को सस्ता कर दिया है, लेकिन लंबी अवधि के लिए दरों में थोड़ी बढ़ोतरी की है।

इन 3 अवधियों के लिए मिली खुशखबरी

बैंक ने शॉर्ट-टर्म (कम अवधि) के लिए दरों में 0.05% (5 बेसिस पॉइंट) की कटौती की है। इसका सीधा मतलब है कि छोटी अवधि के बिजनेस लोन या पर्सनल क्रेडिट लेने वालों को फायदा होगा।

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ओवरनाइट और 1 महीना: 8.10% से घटकर अब 8.05% हो गया है।
3 महीने: 8.20% से घटकर अब 8.15% हो गया है।
6 महीने: 8.35% से घटकर अब 8.30% हो गया है।

3 साल वाले लोन हुए महंगे
जहां शॉर्ट-टर्म में राहत मिली है, वहीं बैंक ने 3 साल की अवधि वाले MCLR को 8.55% से बढ़ाकर 8.60% कर दिया है। यानी जिनके लोन इस अवधि से जुड़े हैं, उनकी जेब पर थोड़ा बोझ बढ़ सकता है।

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ओवरनाइट: 8.10% से 8.05% हुआ
1 महीना : 8.10% से 8.05% हुआ
3 महीने : 8.20% से 8.15% हुआ
6 महीने : 8.35% से 8.30% हुआ
1 साल : 8.35% से 8.35% ही रहा। कोई बदलाव नहीं हुआ।
2 साल : 8.45% से 8.45% ही रहा। कोई बदलाव नहीं हुआ।
3 साल : 8.55% से बढ़कर 8.60% हुआ।

क्या होता है MCLR और आप पर क्या होगा असर?
MCLR वह ‘मिनिमम’ ब्याज दर है जिससे कम पर बैंक लोन नहीं दे सकता। अगर आपका होम लोन या कार लोन MCLR (फ्लोटिंग रेट) से जुड़ा है, तो जब भी आपके लोन का ‘रिसेट पीरियड’ आएगा, आपकी नई EMI बैंक की इन ताज़ा दरों के हिसाब से तय होगी।

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राहत किसे मिलेगी?
उन ग्राहकों को जिनका लोन 1 महीने से 6 महीने की MCLR अवधि से जुड़ा है, उन्‍हें राहत म‍िलेगी। 1 साल और 2 साल की अवधि वाले रेट्स में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जो अधिकांश होम लोन ग्राहकों के लिए राहत की बात है क्योंकि ज्यादातर लोन 1 साल की MCLR से जुड़े होते हैं।

बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि बैंक फिलहाल अपनी लिक्विडिटी (नकदी) और फंड की लागत को बैलेंस करने की कोशिश कर रहा है। बैंक ने बेस रेट और बीपीएलआर (BPLR) में भी संशोधन किया है, जिससे साफ़ है कि बैंक ग्राहकों को अपनी ओर खींचने के लिए शॉर्ट-टर्म रेट्स को आकर्षक बना रहा है।

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First published on: May 08, 2026 03:57 PM

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