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(तिलक भारद्वाज)
Flower Farming: एक समय आया था जब खेती-किसानी से लोगों का मोह भंग होने लगा था। वह कमाई के दूसरे रास्ते तलाशने लगे थे, लेकिन अब वक्त ने फिर करवट ली है। अब लोग वापस खेती पर केंद्रित हो रहे हैं और मोटी कमाई भी कर रहे हैं। हरियाणा के रहने वाले गुरनाम सिंह फूलों की खेती से सालाना 6 से 7 लाख रुपए कमा रहे हैं। वह अपने खेतों में तरह-तरह के फूल उगाते हैं, जिनकी काफी डिमांड रहती है।
गुरनाम सिंह यमुनानगर जिले के ऊर्जनी गांव में फूलों की खेती करते हैं। इस खेती ने उनकी जिंदगी में भी फूलों जैसी महक भर दी है। शुरुआत में उन्हें कुछ परेशानी जरूर हुई, लेकिन अब सब कुछ अच्छा चल रहा है। उनके उगाए फूलों की कई शहरों में डिमांड रहती है। जिले में आधुनिक खेती को नई पहचान दिलाने वाले गुरनाम सिंह कई सालों से फूलों की खेती कर रहे हैं।
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गुरनाम सिंह ने बताया कि करीब 17 साल पहले उनके दिमाग में फूलों के खेती का विचार आया। उन्होंने खेती के लिए पर्याप्त जानकारी जुटाई और मिशन में जुट गए। शुरुआत में उन्हें फूलों को बेचने में बहुत परेशानी हुई। लेकिन वह हिम्मत के साथ मैदान में डटे रहे। दो-तीन साल कठिनाई से गुजारने के बाद उनके फूलों को अच्छा बाजार मिला। आज पूरे जिले में उन्हें एक अलग पहचान मिल चुकी है।
प्रगतिशील किसान गुरनाम सिंह करीब डेढ़ एकड़ में फूलों की खेती कर रहे हैं। वह गेंदा सहित अलग-अलग तरह के फूलों की खेती करते हैं। अकेले गेंदे के फूलों की बिक्री से ही वह तीन लाख कमा लेते हैं। कुल मिलाकर वह छह से सात लाख रुपये सालाना कमा रहे हैं। गुरनाम सिंह का कहना है कि हरियाणा सरकार से उन्हें काफी सहयोग मिलता रहा है, जिससे सफल किसान बनने का उनका रास्ता आसान हुआ।

किसान गुरनाम ने कहा कि हरियाणा सरकार के उद्यान विभाग की तरफ से उन्हें समय-समय पर सब्सिडी भी मिलती रहती है। अगर उन्हें कोई परेशानी होती है, तो वह सीधा उद्यान विभाग पहुंच जाते हैं। यहां के अधिकारी उनकी हर समस्या को हल करने की पूरी कोशिश करते हैं। सिंह ने बताया कि उन्होंने फूलों की खेती के बीच में पॉपुलर के पेड़ भी लगाए हैं, जिससे उन्हें दोगुना मुनाफा हो रहा है।
गुरनाम सिंह कहते हैं कि किसानों को परंपरागत खेती छोड़कर अब आधुनिक खेती की ओर कदम बढ़ाना चाहिए, क्योंकि इसमें मुनाफा ज्यादा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक खेती में परंपरागत खेती की तुलना में जोखिम भी ज्यादा है, लेकिन समय के साथ जोखिम के स्तर को सीमित किया जा सकता है। गुरनाम के खेतों में तैयार फूलों की डिमांड दिल्ली, हिमाचल, उत्तराखंड और हरियाणा के कई जिलों में है। वह जाफरी, गुलदावरी और ग्लेडियोलस किस्म के फूल भी तैयार करते हैं और उन्हें लोकल मार्केट में बेचते हैं।
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