अगर आप एयर कंडीशनर खरीदने या अपने घर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए कुछ फैंसी बाथवेयर या तांबे के बर्तन खरीदने की सोच रहे हैं, तो आपको पहले के मुकाबले अब ज्यादा पैसा चुकाने की जरूरत पड़ सकती है. क्योंकि कॉपर यानी तांबे की कीमत में ताबड़तोड़ बढ़ोतरी हो रही है. ऐसे में तांबे से बनी चीजों पर इसका असर दिखने लगा है. खासतौर से घरेलू प्रोडक्ट्स पर इसका असर दिखने लगा है.
ब्लूमबर्ग के डेटा के अनुसार, पिछले महीने तांबे की कीमतें रिकॉर्ड 12,000 डॉलर प्रति टन से ज्यादा हो गईं, जो साल 2009 के बाद से इसकी सबसे बड़ी सालाना बढ़ोतरी है. कई कंपनियां इंपोर्ट और लोकल सोर्सिंग के मिक्स से तांबा खरीदती हैं. ग्लोबल कीमतों में उतार-चढ़ाव कुल कीमत पर असर डालता है. AC कैटेगरी की इनपुट कॉस्ट पर कुल असर 8-10% बढ़ गया है. फिलहाल, सभी नए बने AC पर कॉपर की लागत के साथ-साथ एनर्जी टेबल में बदलाव की लागत का भी असर पड़ेगा, जिससे AC की कीमतों में 7-8% की बढ़ोतरी होगी.
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तांबे से बनी चीजें महंगी
MCX पर, शुक्रवार शाम को कॉपर की कीमतें लगभग 1300 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गईं, जो 6% से ज्यादा की बढ़ोतरी है. दूसरी ओर ब्रास की कीमत में भी 15-18% की तेजी देखी जा रही है. कंपनियां एक हद से ज्यादा दा लागत को बर्दाश्त नहीं कर सकतीं. ऐसे में कस्टमर्स पर इसका असर दिखेगा.
पिछले साल कॉपर और एल्युमीनियम और लिथियम जैसी दूसरी इंडस्ट्रियल मेटल्स की कीमतों में तेजी आई क्योंकि ब्याज दरें कम हुईं, डॉलर कमजोर हुआ और चीन की आर्थिक ग्रोथ की उम्मीदें बेहतर हुईं. सप्लाई में रुकावटें, पॉलिसी में बदलाव और AI पर बड़े पैमाने पर खर्च ने भी कीमतों को बढ़ाया.
अगर आप एयर कंडीशनर खरीदने या अपने घर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए कुछ फैंसी बाथवेयर या तांबे के बर्तन खरीदने की सोच रहे हैं, तो आपको पहले के मुकाबले अब ज्यादा पैसा चुकाने की जरूरत पड़ सकती है. क्योंकि कॉपर यानी तांबे की कीमत में ताबड़तोड़ बढ़ोतरी हो रही है. ऐसे में तांबे से बनी चीजों पर इसका असर दिखने लगा है. खासतौर से घरेलू प्रोडक्ट्स पर इसका असर दिखने लगा है.
ब्लूमबर्ग के डेटा के अनुसार, पिछले महीने तांबे की कीमतें रिकॉर्ड 12,000 डॉलर प्रति टन से ज्यादा हो गईं, जो साल 2009 के बाद से इसकी सबसे बड़ी सालाना बढ़ोतरी है. कई कंपनियां इंपोर्ट और लोकल सोर्सिंग के मिक्स से तांबा खरीदती हैं. ग्लोबल कीमतों में उतार-चढ़ाव कुल कीमत पर असर डालता है. AC कैटेगरी की इनपुट कॉस्ट पर कुल असर 8-10% बढ़ गया है. फिलहाल, सभी नए बने AC पर कॉपर की लागत के साथ-साथ एनर्जी टेबल में बदलाव की लागत का भी असर पड़ेगा, जिससे AC की कीमतों में 7-8% की बढ़ोतरी होगी.
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तांबे से बनी चीजें महंगी
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पिछले साल कॉपर और एल्युमीनियम और लिथियम जैसी दूसरी इंडस्ट्रियल मेटल्स की कीमतों में तेजी आई क्योंकि ब्याज दरें कम हुईं, डॉलर कमजोर हुआ और चीन की आर्थिक ग्रोथ की उम्मीदें बेहतर हुईं. सप्लाई में रुकावटें, पॉलिसी में बदलाव और AI पर बड़े पैमाने पर खर्च ने भी कीमतों को बढ़ाया.