डिग्री बड़ी पर पैकेज छोटा? कैंपस प्लेसमेंट में क्यों कम हो रहा है CTC, जानें Gen-Z के लिए क्या हैं नए संकेत

First Job Package: क्या फ्रेसर्स के लिए लाखों का पैकेज अब सपना बन गया है? AI का असर और घटती सैलरी ने कैंपस प्लेसमेंट का गणित बिगाड़ दिया है। क्यों कंपनियां अब कम CTC ऑफर कर रही हैं? जानें जॉब मार्केट की कड़वी सच्चाई।

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कल तक जो कॉलेज कैंपस प्लेसमेंट में करोड़ों के पैकेज की खबरें सुर्खियां बनती थीं, आज वहां का नजारा बदला बदला सा है। भारतीय जॉब मार्केट में इस वक्त एक अजीबोगरीब स्थिति बनी हुई है। एक तरफ महंगाई आसमान छू रही है, तो दूसरी तरफ फ्रेसर्स (Freshers) को मिलने वाली शुरुआती सैलरी यानी CTC में भारी गिरावट देखी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जॉब मार्केट में आए इस बड़े बदलाव ने जेन-जी (Gen-Z) और उनके माता-पिता की चिंता बढ़ा दी है।

क्या हैं इस गिरावट के 3 बड़े कारण?

AI का बढ़ता दखल (The AI Disruption):
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल चर्चा का विषय नहीं रहा, बल्कि इसने एंट्री-लेवल नौकरियों पर सीधा प्रहार किया है। जो काम पहले 5 फ्रेसर्स मिलकर करते थे, अब वह एक अनुभवी कर्मचारी AI टूल्स की मदद से कर पा रहा है। कंपनियों को अब ‘जनरल’ फ्रेसर्स की जरूरत कम और ‘AI स्किल्ड’ लोगों की तलाश ज्यादा है।

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सैलरी एक्सपेक्टेशन गैप (The Expectation Gap):
रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रों की उम्मीदें और कंपनियों की हकीकत के बीच एक बड़ी खाई पैदा हो गई है। छात्र आज भी पुराने ‘हाइप’ के आधार पर ₹10-12 लाख के पैकेज की उम्मीद करते हैं, जबकि कंपनियां अब ₹4-6 लाख के बैंड में सिमट गई हैं।

बेंच खत्म करने की होड़:
आईटी (IT) सेक्टर की दिग्गज कंपनियां अब ‘बेंच’ (कर्मचारियों को बिना प्रोजेक्ट के रखना) पर निवेश करने से बच रही हैं। अब हायरिंग ‘जरूरत के आधार’ (Just-in-time hiring) पर हो रही है, जिससे कैंपस प्लेसमेंट में वैसी आक्रामकता नहीं दिख रही जो 2 साल पहले थी।

जेन-जी (Gen-Z) के लिए नई चुनौती
आज के दौर के फ्रेसर्स यानी जेन-जी के लिए सिर्फ डिग्री काफी नहीं है। कंपनियों का कहना है कि वे कम सैलरी पर भी ऐसे फ्रेसर्स को ढूंढ रही हैं जो पहले दिन से ही आउटपुट दे सकें। कोडिंग, डेटा एनालिटिक्स और सॉफ्ट स्किल्स के बिना अब ‘मिडिल-क्लास ड्रीम’ को पूरा करना मुश्किल होता जा रहा है।

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मार्केट एक्सपर्ट्स की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति अगले कुछ सालों तक बनी रह सकती है। हाइपर-हायरिंग का दौर खत्म हो चुका है और अब वैल्यू-हायरिंग का जमाना है। फ्रेसर्स को सलाह दी जा रही है कि वे शुरुआती पैकेज के बजाय लर्निंग कर्व और स्किल डेवलपमेंट पर ज्यादा ध्यान दें।

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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