16 दिनों में 1 लाख करोड़ रुपये स्वाहा! हर घंटे 1000 करोड़ निकाल रहे विदेशी निवेशक; जानें क्यों मची है भगदड़?

पिछले 16 दिनों में 100,000 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली ने दलाल स्ट्रीट को हिला कर रख दिया है। हर घंटे 1000 करोड़ रुपये की निकासी… क्या भारतीय बाजार अब भी सुरक्षित हैं? मिडिल ईस्ट की जंग और $100 के पार कच्चा तेल कैसे डुबो रहा है निवेशकों का पैसा? देखिए इस वॉटर स्ट्राइक से भी बड़ी मार्केट स्ट्राइक की पूरी रिपोर्ट।

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भारतीय शेयर बाजार से अपना पैसा न‍िकाल रहे हैं व‍िदेशी न‍िवेशक

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मुंबई/नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार इस समय विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) की चौतरफा बिकवाली की मार झेल रहा है। अमेरिका-ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता ने विदेशी निवेशकों को भारत से पैसा निकालने पर मजबूर कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महज 16 ट्रेडिंग सत्रों में विदेशी निवेशकों ने द्वितीयक बाजार (Secondary Market) से 100,040 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। शेयर बाजार में मचे इस हाहाकार ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। विदेशी निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से जिस रफ्तार से पैसा निकाला है, वह डराने वाला है।

हर घंटे 1000 करोड़ रुपये की एग्जिट

यह बिकवाली कितनी भयानक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बाजार खुलने के हर एक घंटे में विदेशी निवेशक औसतन ₹1,000 करोड़ का माल बेचकर बाहर निकल रहे हैं। 2026 में अब तक हुए 50 ट्रेडिंग सत्रों में से 33 में FIIs ने सिर्फ बिकवाली की है।

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क्यों भाग रहे हैं विदेशी निवेशक?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस महा-बिकवाली के पीछे 4 मुख्य कारण हैं:

  1. कच्चा तेल $100 के पार: भारत अपनी जरूरत का 85-90% तेल आयात करता है। युद्ध की वजह से तेल महंगा होने से भारत की राजकोषीय स्थिति और महंगाई पर दबाव बढ़ा है।
  2. रुपये में गिरावट: डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से विदेशी निवेशकों को दोहरा घाटा हो रहा है, एक शेयर की गिरती कीमतों से और दूसरा करेंसी वैल्यू कम होने से।
  3. महंगा भारतीय बाजार: विशेषज्ञों का मानना है कि अन्य देशों (जैसे अमेरिका, जापान, कोरिया) के मुकाबले भारतीय शेयर बाजार काफी महंगे (Expensive Valuation) हो गए हैं।
  4. AI और क्रिप्टो का आकर्षण: वैश्विक स्तर पर अब पैसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्रिप्टोकरेंसी जैसे नए क्षेत्रों की ओर शिफ्ट हो रहा है।

FIIs की संपत्ति 13 महीने के निचले स्तर पर
विदेशी निवेशकों की कस्टडी में मौजूद संपत्ति (Assets Under Custody) घटकर 65.63 लाख करोड़ रुपये रह गई है, जो 13 महीने का सबसे निचला स्तर है। दिसंबर 2025 में यह 74.27 लाख करोड़ रुपये थी। भारतीय इक्विटी मार्केट में उनकी हिस्सेदारी भी गिरकर 15.3% रह गई है।

घरेलू निवेशकों (DIIs) ने संभाला मोर्चा
हैरानी की बात यह है कि जहां विदेशी निवेशक भाग रहे हैं, वहीं भारतीय घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने रिकॉर्ड खरीदारी की है। इसी दौरान DIIs ने 116,586 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। म्यूचुअल फंड SIP, बीमा और पेंशन फंड्स के जरिए भारतीय निवेशकों का पैसा बाजार में आ रहा है। हालांकि, घरेलू निवेशकों की यह भारी खरीदारी भी बाजार को गिरने से नहीं रोक पाई और सेंसेक्स-निफ्टी में 10% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।

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मिडकैप और स्मॉलकैप भी धराशायी
इस बिकवाली की आंच सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप 150 इंडेक्स में 7.5% और स्मॉलकैप 250 इंडेक्स में 7.8% की गिरावट आई है, जिससे छोटे निवेशकों के पोर्टफोलियो को गहरा झटका लगा है।

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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