अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब अपना रुख चीन की ओर मोड़ दिया है। इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल होने के बाद, ट्रंप ने बीजिंग को चेतावनी दी है कि यदि उसने ईरान को हथियारों की सप्लाई की, तो चीन पर 50% का भारी-भरकम आयात शुल्क (Tariff) लगा दिया जाएगा। यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें दावा किया गया था कि चीन, ईरान को आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भेजने की तैयारी कर रहा है।
ट्रंप ने क्या कहा?
फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा, “मुझे संदेह है कि वे (चीन) ऐसा करेंगे… लेकिन अगर हमने उन्हें ऐसा करते पकड़ लिया, तो उन पर 50% टैरिफ लगेगा, जो कि एक चौंकाने वाली बड़ी राशि होगी।” ट्रंप ने न केवल चेतावनी दी, बल्कि चीन को तेल के लिए ईरान पर निर्भरता कम करने के विकल्प भी पेश किए।
ट्रंप ने कहा कि चीन अपने जहाज अमेरिका या वेनेजुएला भेज सकता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका, ईरान की तुलना में भी कम कीमत पर तेल बेच सकता है। बता दें कि अमेरिका ने इस साल की शुरुआत में वेनेजुएला पर हमला कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में ले लिया था, जिसके बाद अब वहां के तेल भंडार पर अमेरिका का नियंत्रण है।
कानूनी पचड़ों में फंसा टैरिफ का खेल
डोनाल्ड ट्रंप के लिए टैरिफ लगाना अब उतना आसान नहीं है, जितना पहले था। दरअसल, अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने भारत, चीन, ब्राजील और कनाडा जैसे देशों पर ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद, ट्रंप अब अमेरिकी कांग्रेस को बाईपास (Bypass) करने के लिए नए व्यापार कानूनों का सहारा ले रहे हैं ताकि भू-राजनीतिक दबाव बनाने के लिए टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सके।
इससे पहले ट्रंप ने चीन पर 125% टैरिफ लगाया था, जिसे बातचीत के बाद घटाकर 30% कर दिया गया था। अब 50% की नई धमकी ने व्यापार युद्ध की आहट दे दी है।
शी जिनपिंग के साथ होने वाली बैठक पर नजर
चीन का दावा है कि उसने ही ईरान को अमेरिका के साथ अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) के लिए मनाया था। अगले महीने की शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप बीजिंग का दौरा करने वाले हैं, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी। इस बैठक से पहले ट्रंप के कड़े तेवरों ने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।










