इनकम टैक्स फाइल करने की डेट नजदीक आ रही है, ऐसे में टैक्स कैलकुलेशन भी शुरू हो गई है। टैक्सधारक इस गुणा-भाग में लगे हैं कि किस टैक्स रिजीम में ज्यादा फायदा है। न्यू टैक्स रिजीम उनका ज्यादा टैक्स बचा सकती है या फिर पुरानी टैक्स रिजीम में ज्यादा लाभ है? इस बीच एक बड़ा सवाल यह भी है कि पुरानी कर व्यवस्था के तहत मकान किराया भत्ता (HRA)का दावा करने वाला व्यक्ति क्या सोसाइटी को दिए जाने वाले मेंटेनेंस शुल्क पर भी टैक्स छूट का दावा कर सकता है?
सोसाइटी में रहने वाले बढ़े
आजकल बड़ी संख्या में लोग हाउसिंग सोसाइटी में रहते हैं, जहां उन्हें मेंटेनेंस शुल्क का भी भुगतान करना पड़ता है। एक तरह से यह भी किराये का हिस्सा है, लेकिन इसे किराया माना नहीं जाता। तो क्या इस पर भी टैक्स छूट का लाभ हासिल किया जा सकता है? ET की एक रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स के हवाले से इसका जवाब देने की कोशिश की गई है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
आईटीआर फाइलिंग वेबसाइट Tax2Win.in के सीईओ अभिषेक सोनी कहते हैं कि आयकर अधिनियम में रखरखाव शुल्क यानी मेंटेनेंस चार्ज पर एचआरए छूट के बारे में कोई विशेष उल्लेख नहीं है। उनका मानना है कि रखरखाव शुल्क का रेंट एग्रीमेंट में किराये के हिस्से के रूप में उल्लेख किया जाना चाहिए, बशर्ते कि किरायेदार इसे मकान मालिक को दे, जो बाद में उस भुगतान को सोसायटी को भेज दे। हालांकि, इससे मकान मालिक का किराया बढ़ जाएगा और उसे भुगतान किए गए खर्च (रखरखाव शुल्क) का कोई लाभ नहीं मिलेगा। दूसरी ओर, यदि रखरखाव शुल्क का भुगतान किरायेदार द्वारा सीधे सोसायटी को किया जाता है, तो ऐसे रखरखाव शुल्क HRA टैक्स छूट के लिए पात्र नहीं होंगे।
ऐसा कोई प्रावधान नहीं
वहीं, नांगिया एंडरसन इंडिया की कार्यकारी निदेशक संजोली माहेश्वरी का कहना है कि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10 (13A) के प्रावधानों के अनुसार, एचआरए पर टैक्स छूट केवल वेतनभोगी करदाता द्वारा किराये पर लिए गए घर के संबंध में रेंट पेमेंट पर दी जाती है। अन्य व्यय, जैसे रखरखाव शुल्क, बिजली शुल्क, उपयोगिता भुगतान, आदि, भले ही अनुबंध के अनुसार किराये का हिस्सा हों, लागू प्रावधानों के अनुसार रेंट पेमेंट का हिस्सा नहीं माने जाएंगे और इसलिए, टैक्स छूट का दावा करने के लिए पात्र नहीं होंगे।
पात्र छूट का हिस्सा नहीं
ट्राइलीगल की टैक्स पार्टनर अदिति गोयल के अनुसार, आयकर कानून के तहत, वेतनभोगी कर्मचारी कुछ शर्तों को पूरा करने पर एचआरए छूट का दावा करने के पात्र हैं। ऐसी छूट नियोक्ता द्वारा किराये के भुगतान पर वास्तव में किए गए व्यय को पूरा करने के लिए विशेष रूप से दिए गए किसी भी भत्ते के संबंध में दी जाती है। HRA छूट केवल किराये के भुगतान तक ही सीमित होनी चाहिए। ऐसे मामलों में जहां किरायेदार को रखरखाव शुल्क, बिजली बिल, पानी बिल आदि के रूप में अतिरिक्त भुगतान की आवश्यकता होती है, ऐसी राशि जो किराये के रूप में योग्य नहीं है, उसे HRA छूट के लिए पात्र व्यय का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।
क्या है HRA छूट का नियम?
आमतौर पर, किसी कर्मचारी के सैलरी स्ट्रक्चर में HRA एक कॉम्पोनेन्ट के रूप में शामिल होता है। वेतनभोगी कर्मचारी एचआरए पर कर छूट का दावा कर सकता है, यदि वह किराए के मकान में रह रहा है और उसे वेतन के हिस्से के रूप में एचआरए मिलता है। आयकर अधिनियम की धारा 10(13) के तहत एचआरए टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है। इनकम टैक्स कानून में यह नियम परिभाषित किया गया है कि कोई कर्मचारी कितनी HRA कर छूट का दावा कर सकता है।
कितना क्लेम किया जा सकता है HRA?
HRA की अधिकतम क्लेम की जाने वाली राशि मूल वेतन, शहर और वास्तविक किराये पर निर्भर करती है, जो इन तीनों में से सबसे कम हो।
नियोक्ता से कर्मचारी द्वारा प्राप्त एचआरए की कुल राशि
मेट्रो शहरों में रहने पर वेतन का 50% या नॉन-मेट्रो शहरों में रहने पर वेतन का 40%,
वास्तविक भुगतान किया गया किराया – वेतन का 10%।
HRA कर छूट का दावा कैसे करें?
एचआरए छूट का दावा नियोक्ता को प्रमाण प्रस्तुत करके या आयकर रिटर्न दाखिल करते समय किया जा सकता है। हालांकि, यदि HRA से संबंधित साक्ष्य नियोक्ता को प्रस्तुत किए जाते हैं, तो वेतन से लोअर टैक्स काटा जाएगा। इसके अलावा, कर छूट की गणना नियोक्ता द्वारा की जाती है और फॉर्म 16 में दर्शाई जाती है। दूसरी ओर, यदि आईटीआर में एचआरए टैक्स छूट का दावा किया जाता है, तो वेतनभोगी कर्मचारी को कर छूट की गणना मैन्युअल रूप से करनी होगी। इसके अतिरिक्त, चूंकि छूट का दावा नियोक्ता के माध्यम से नहीं किया जाता है, इसलिए आयकर विभाग कर्मचारी को टैक्स नोटिस भेजकर दावा किए गए HRA का प्रमाण साझा करने के लिए कह सकता है।
इसका जरूर रखें ख्याल
वेतनभोगी कर्मचारी को अपने HRA छूट के दावे को मान्य करने के लिए कुछ दस्तावेज रखने चाहिए। इसमें किराया समझौता, किराया रसीदें और मकान मालिक का पैन (यदि वार्षिक किराया 1 लाख रुपये से अधिक है) शामिल हैं। इसके अलावा, किराये का भुगतान बैंकिंग माध्यम से किया जाना चाहिए, क्योंकि इसका उपयोग इस बात के प्रमाण के रूप में किया जा सकता है कि कर्मचारी द्वारा वास्तव में किराये का भुगतान किया गया है।
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