टैक्सपेयर्स (Taxpayers) और आयकर से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने की दिशा में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सीबीडीटी ने 8 अक्टूबर 2026 को जारी एक आधिकारिक अधिसूचना (Income-tax Sixth Amendment Rules, 2026) के जरिए इनकम टैक्स फॉर्म 161 (Form 161) में बड़ा संशोधन किया है.
इस नए संशोधन के तहत इनकम टैक्स रूल्स के नियम 231 (Rule 231) में शब्द Imposition (पेनल्टी लगाने) के साथ ‘or Waiver’ (या छूट/माफी) को जोड़ दिया गया है. इसके साथ ही पुराने फॉर्म 161 को पूरी तरह से नए और व्यापक (Comprehensive) फॉर्म से बदल दिया गया है.
आइए, समझते हैं कि इस नए फॉर्म 161 से पेनल्टी माफी (Penalty Waiver) का रास्ता कैसे साफ हुआ है, कौन इसके लिए आवेदन कर सकता है और इसके फायदे व शर्तें क्या हैं .
फॉर्म 161 में क्या बदलाव हुआ है?
आयकर अधिनियम (Income Tax Act, 2025) के तहत यदि किसी करदाता को असेसमेंट या री-असेसमेंट (Assessment / Re-assessment) के बाद अंडर-रिपोर्टिंग या मिस-रिपोर्टिंग (कम आय दिखाने या गलत जानकारी देने) के लिए पेनल्टी का नोटिस मिलता है, तो वह राहत पाने के लिए फॉर्म 161 का इस्तेमाल करता है.
पहले नियम 231 में केवल पेनल्टी से छूट या बचाव (Immunity from Imposition) की बात की गई थी. नए संशोधन में Waiver (माफी) शब्द जुड़ जाने से अब टैक्सपेयर्स उन मामलों में भी पेनल्टी माफी की गुहार लगा सकते हैं, जहां पेनल्टी का आदेश पहले ही पारित (Imposed) हो चुका है. इसके साथ ही ये भी बता दें कि बदले गए फॉर्म 161 में अब पहले से पारित पेनल्टी ऑर्डर का पूरा ब्योरा और एक्स्ट्रा टैक्स (Additional Income-Tax) भुगतान का सबूत देना अनिवार्य कर दिया गया है.
Section 533, 440 और Rule 231 का मतलब?
टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार इन तीनों प्रावधानों का अलग-अलग रोल है:
Section 533: यह धारा CBDT को नियम बनाने और फॉर्म/प्रक्रियाएं तय करने का अधिकार देती है.
Section 440: यह मुख्य धारा है, जो असेसिंग ऑफिसर (AO) को अंडर-रिपोर्टिंग/मिस-रिपोर्टिंग पर लगी पेनल्टी माफ करने और मुकदमों (Prosecution) से छूट देने का अधिकार देती है.
Rule 231 & Form 161: यह नियम फॉर्म 161 के जरिए आवेदन करने की पूरी लीगल प्रक्रिया और अतिरिक्त टैक्स कैलकुलेशन का तरीका तय करता है.
कौन कर सकता है पेनल्टी माफी के लिए आवेदन?
अगर आपको धारा 439 के तहत पेनल्टी का सामना करना पड़ रहा है, तो आप नीचे दी गई शर्तों को पूरा करके ही फॉर्म 161 भर सकते हैं:
- टैक्स और ब्याज का भुगतान: असेसमेंट ऑर्डर में मांगी गई पूरी टैक्स और ब्याज की रकम को नोटिस में दी गई समय-सीमा के भीतर जमा करना होगा.
- अतिरिक्त टैक्स (Additional Tax) का भुगतान: पेनल्टी माफी के बदले निर्धारित एडिशनल इनकम-टैक्स (जो कुछ मामलों में संबंधित टैक्स का 100% से 120% तक हो सकता है) जमा करना होगा.
- अपील न करने का हलफनामा: करदाता ने असेसमेंट ऑर्डर के खिलाफ कोई अपील फाइल न की हो, और न ही भविष्य में अपील दायर करने का वचन दे.
- आपराधिक मामला न हो: अगर चैप्टर XXII (Chapter XXII) के तहत पहले से क्रिमिनल प्रोसिक्यूशन शुरू हो चुका है, तो इस राहत का फायदा नहीं मिलेगा.
फॉर्म 161 भरने की आखिरी तारीख
असेसमेंट या री-असेसमेंट ऑर्डर मिलने वाले महीने के अंत से 1 महीने के भीतर फॉर्म 161 दाखिल करना अनिवार्य है. असेसिंग ऑफिसर (AO) को आवेदन मिलने वाले महीने के अंत से 3 महीने के भीतर फैसला सुनाना होगा. बिना सुनवाई का मौका दिए आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता.
फॉर्म 161 भरने से पहले इस बात का रखें ध्यान
शेयर बाजार और टैक्स एक्सपर्ट्स अविनाश गुप्ता के अनुसार की सलाह है कि फॉर्म 161 भरने से पहले अपना केस अच्छी तरह जांच लें. एक बार पेनल्टी माफी (Waiver) का आवेदन स्वीकार हो जाने के बाद असेसमेंट ऑर्डर फाइनल हो जाता है. इसके बाद आप उस ऑर्डर के खिलाफ कोर्ट या अपीलीय अथॉरिटी में कोई अपील या रिवीजन फाइल नहीं कर सकते. अगर आपका पक्ष मजबूत है और आपके पास ठोस सबूत हैं, तो अपील में जाने या फॉर्म 161 भरने में से सही विकल्प का चुनाव सोच-समझकर करें.
बता दें कि ये राहत फर्जी एंट्री/झूठे दस्तावेजों के लिए धारा 444 के तहत लगने वाली पेनल्टी पर लागू नहीं होगी.
कब से लागू हुए नए नियम?
यह संशोधन 8 अक्टूबर 2026 (सरकारी गजट में प्रकाशन की तिथि) से ही तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है.