RBI ने बैंकों की नकेल कस दी है. अब बैंकों को अपनी तिजोरी में ज्यादा कैश रखना होगा और वो भी रोज-रोज. RBI ने 9 अक्टूबर को नोटिफिकेशन जारी किया है कि 16 अक्टूबर से बैंकों को रोजाना अपने तय CRR का 99% हिस्सा RBI के पास रखना ही होगा. अभी तक ये लिमिट 90% थी.
पहले CRR को समझ लें, बिल्कुल आसान भाषा में
CRR मतलब Cash Reserve Ratio. आप बैंक में 100 रुपये जमा करते हैं, तो बैंक वो पूरा 100 रुपये आपको लोन में नहीं दे सकता. RBI कहता है कि उसका कुछ हिस्सा, मान लो 4.5% (अभी CRR 4.5% है), तो 4.50 रुपये मेरे पास जमा रखो. ताकि कल को अगर सब लोग एक साथ पैसा मांगने आ जाएं तो बैंक के पास कुछ बैकअप हो.
पहले नियम ये था कि 15 दिन के पखवाड़े में एवरेज 100% रखना है, पर रोज कम से कम 90% रखो तो चलेगा. मतलब आज थोड़ा कम रखा, कल ज्यादा रख दिया तो काम चल जाता था. अब RBI ने कहा- रोज 99% तो रखना ही पड़ेगा. पूरे पखवाड़े का एवरेज तो 100% चाहिए ही.
RBI ने ऐसा क्यों किया?
RBI सिस्टम में जो एक्स्ट्रा कैश घूम रहा है उसे कंट्रोल करना चाहता है. अभी बैंकिंग सिस्टम में 3.92 लाख करोड़ रुपये का एक्स्ट्रा कैश पड़ा है. अगस्त-सितंबर में विदेश से पैसा आया और FCNR-B स्कीम से भी बैंकों के पास पैसा भर गया. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 7 अक्टूबर को ही कहा था कि ये एक्स्ट्रा नकदी धीरे-धीरे कम होगी.
पहले RBI ने Reverse Repo और बॉन्ड बेचकर पैसा खींचा, अब ये CRR वाला नियम सख्त कर दिया.
आप पर क्या असर पड़ेगा?
लोन महंगा हो सकता है: बैंकों के पास लोन देने के लिए रोज थोड़ा कम पैसा बचेगा, तो हो सकता है वो लोन का इंटरेस्ट थोड़ा बढ़ा दें.
FD पर फायदा मिल सकता है: बैंकों को पैसा रोकना है तो वो लोगों से ज्यादा पैसा जमा करवाने के लिए FD पर ब्याज थोड़ा बढ़ा सकते हैं.
बाजार में उथल-पुथल कम होगी: रोज-रोज बैंक इधर-उधर ज्यादा पैसा नहीं घुमा पाएंगे, तो मार्केट में लिक्विडिटी स्टेबल रहेगी.
यानी सीधी बात ये है कि RBI ने CRR की दर नहीं बढ़ाई है, वो अभी भी 4.5% ही है, सिर्फ रोज मेंटेन करने वाला नियम सख्त किया है ताकि बैंक ज्यादा होशियारी न दिखा पाएं.