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Budget 2026: क्या इस साल कम देना होगा Income Tax? मिडिल क्लास को नई राहत की उम्मीद

बजट 2026 के करीब आते ही अक्सर पुराने टैक्स सिस्टम की चर्चा होती है. चर्चा है कि वित्त मंत्री 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट 2026 में मिडिल क्लास को राहत देने के लिए इन स्लैब की सीमाओं को और बढ़ा सकती हैं या टैक्स दरों में और कटौती कर सकती हैं.

Author Written By: Vandana Bharti Updated: Jan 26, 2026 14:11
आपकी आय पर क‍ितनी टैक्‍स छूट म‍िल सकती है

बजट 2026 को पेश होने में अब बस कुछ ही द‍िन रह गए हैं. 1 फरवरी 2026 को न‍िर्मला सीतारमण देश का आम बजट 2026 पेश करेंगी. बजट का समय जैसे-जैसे करीब आ रहा है, सभी सेक्‍टर्स बजट से अपनी उम्‍मीदें जाह‍िर कर रहे हैं. ऐसे में इस बार म‍िड‍िल क्‍लास को बजट से बहुत सी उम्‍मीदें हैं और उनमें से एक है इनकम टैक्‍स में राहत. तो क्‍या इस बार इनकम टैक्‍स में ज्‍यादा राहत म‍िलने की गुंजाइश है? लेक‍िन ये जानने से पहले, आपको ये भी जानना चाह‍िए क‍ि इनकम टैक्‍स स्‍लैब हमेशा 7 नहीं था. पहले 11 स्‍लैब्‍स हुआ करते थे.

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टैक्स का सफर: 11 स्लैब से शुरू होकर 7 तक पहुंचने की कहानी

भारत में इनकम टैक्स का इतिहास काफी दिलचस्प रहा है. अगर हम आजादी के बाद के दौर को देखें और आज के सिस्टम से उसकी तुलना करें, तो बहुत कुछ बदल चुका है:

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आजादी के बाद का दौर का टैक्स सिस्टम काफी पेचीदा था. आम आदमी की कमाई पर टैक्स लगाने के लिए 11 अलग-अलग स्लैब हुआ करते थे. यानी आपकी कमाई के हिसाब से टैक्स की दरें बार-बार बदलती थीं, जिससे हिसाब-किताब रखना काफी मुश्किल होता था. फ‍िर बदलाव का सिलसिला शुरू हुआ. पिछले कई दशकों में अलग-अलग सरकारों ने इसमें सुधार किए. मकसद एक ही था – टैक्स भरने की प्रक्रिया को आसान बनाना और लोगों पर टैक्स का बोझ कम करना.

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लगातार संशोधनों के बाद, बजट 2025 में जो ‘नई कर प्रणाली’ (New Tax Regime) पेश की गई, उसमें अब केवल 7 टैक्स स्लैब रह गए हैं. स्लैब कम होने का सीधा मतलब ये है क‍ि लोगों को कम उलझन होगी और कैलकुलेशन आसान होगा. सरकार अब टैक्स सिस्टम को और भी सरल बनाने की दिशा में काम कर रही है, ताकि आम आदमी को अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के लिए विशेषज्ञों पर निर्भर न रहना पड़े.

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बजट 2025 में पेश की गई नया टैक्‍स प्रणाली (New Tax Regime) के अनुसार अभी 7 टैक्स स्लैब हैं. आइये आपको बताते हैं क‍ि आपकी कितनी कमाई पर सरकार कितना हिस्सा टैक्स के रूप में लेती है:

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0 से 400000 रुपये तक 0% (कोई टैक्स नहीं)
400001 से 800000 रुपये तक 5%
800001 से 1200000 रुपये तक 10%
1200001 से 1600000 रुपये तक 15%
1600001 से 2000000 रुपये तक 20%
2000001 से 2400000 रुपये तक 25%
2400000 रुपये से ऊपर रुपये तक 30%

बजट 2026 को लेकर मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों में काफी उत्साह है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से इस बार इनकम टैक्स में बड़ी राहत की उम्मीदें जताई जा रही हैं. मीडिया रिपोर्ट्स और टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस बार निम्नलिखित मुख्य छूट मिलने की संभावना है:

टैक्स फ्री इनकम की लिमिट (Standard Deduction)
सैलरीड क्लास के लिए ‘स्टैंडर्ड डिडक्शन’ को 75,000 से बढ़ाकर 100000 रुपये किया जा सकता है. अगर ऐसा होता है, तो आपकी टैक्स योग्य आय (Taxable Income) सीधे 25000 और कम हो जाएगी, जिससे टेक-होम सैलरी बढ़ेगी.

87A के तहत रिबेट (Tax Rebate Expansion)
अभी 12 लाख तक की सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता (धारा 87A की छूट के बाद). मिडिल क्लास को महंगाई से राहत देने के लिए इस सीमा को बढ़ाकर 15 लाख तक किया जा सकता है. यानी 15 लाख रुपये कमाने वालों को भी ‘जीरो टैक्स’ के दायरे में लाने की चर्चा है.

टैक्स स्लैब में बदलाव
अभी 24 लाख से ऊपर की कमाई पर 30% टैक्स लगता है. टैक्सपेयर्स की मांग है कि इस सीमा को बढ़ाकर 30 लाख रुपये किया जाए. 5% और 10% वाले स्लैब की इनकम लिमिट को भी थोड़ा और चौड़ा (Widen) किया जा सकता है ताकि कम कमाने वालों के हाथ में ज्यादा पैसा बचे.

होम लोन और सीनियर सिटीजन को राहत
रियल एस्टेट सेक्टर की मांग है कि होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली छूट को बढ़ाया जाए ताकि घर खरीदना सस्ता हो. बुजुर्गों के लिए FD और बचत योजनाओं से होने वाली ब्याज आय पर TDS की सीमा को 1 लाख रुपये तक करने की उम्मीद है.

First published on: Jan 26, 2026 02:11 PM

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