देश के हर व्यक्ति के लिए आम बजट, बेहद खास होता है, क्योंकि हर क्षेत्र और तबके के लोगों की कोई न कोई उम्मीद इससे जुड़ी हुई है. एक छोटे किसान से लेकर बड़े इंडस्ट्रस्टलिस्ट तक को बजट से राहत की आस है. आम लोगों को बजट से महंगाई करने की उम्मीद है. देश के हेल्थ सेक्टर को (healthcare sector) को भी बजट से कुछ आस है. खासकर ऐसे समय में जब प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन गया है और कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ती जारी है.
लेकिन इस बार फोकस कुछ और भी है. इस साल डिजिटल हेल्थ और टेलीकंसल्टेशन पर भी नजर रहेगी. खासकर गांवों और दूरदराज के इलाकों में मेडिकल फैसिलिटी को पहुंचाने में इनकी बड़ी भूमिका हो सकती है. इससे न केवल इलाज पर होने वाले खर्च को कम किया जा सकता है, बल्कि तेज मदद पहुंचाने में भी मदद मिलेगी. आइये जानते हैं कि मेडिकल क्षेत्र के लिए बजट के पिटारे में क्या-क्या हो सकता है?
रिसर्च और डिजिटल इनोवेशन के लिए ज्यादा बजट
ग्रामीण क्षेत्रों में टेली-मेडिसिन और ई-संजीवनी जैसी सेवाओं को मजबूत करने के लिए ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ (ABDM) के लिए अधिक फंड की उम्मीद की जा रही है. वहीं इस वास्तविकता को जानते हुए कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की पहचान जल्दी हो जाए तो उसका इलाज संभव है, हेल्थ केयर सेक्टर चाहता है कि इस बजट में इस शुरुआती पहचान (Early Diagnosis) के लिए एआई-आधारित तकनीकों पर निवेश भी शामिल हो.
मेडिकल डिवाइसेज पर रियायत और हेल्थ चेकअप पर छूट
भारत अपनी 80% मेडिकल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है. उद्योग जगत ने लाइफ-सेविंग मशीनों (जैसे वेंटिलेटर, डायलिसिस) पर सीमा शुल्क और GST को 12% से घटाकर 5% करने की मांग की है. वहीं, धारा 80D के तहत प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप की सीमा को 5000 से बढ़ाकर 10000 करने की उम्मीद की जा रही है.
इंफ्रास्ट्रक्चर फंड
हेल्थ सेक्टर ये भी चाहता है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने के लिए 50000 करोड़ का एक डेडिकेटेड ‘हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड’ बनाए. दूसरी ओर आयुष्मान भारत (PM-JAY) के लिए इस साल आवंटन 10000 करोड़ के पार जाने की उम्मीद है. इस बार बजट से ये उम्मीद भी की जा रही है कि सरकार इस योजना का दायरा बढ़ाकर मध्यम वर्ग को भी शामिल कर सकती है, जिन्हें वर्तमान में किसी भी स्वास्थ्य बीमा का लाभ नहीं मिलता.