दुनिया के सबसे बड़े Global AI Vibrancy Index (Stanford HAI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, एआई की दौड़ अब बड़ी दो शक्तियों (US vs China) से आगे बढ़कर तीन दिग्गजों की रेस बन गई है.
एआई पावरहाउस: कौन कहां खड़ा है?
- अमेरिका (USA): हार्डवेयर, निवेश (109 अरब डॉलर) और फ्रंटियर मॉडल्स (जैसे o1, Llama 3.1)
- चीन (China): रिसर्च पेपर, पेटेंट्स, और एआई बुनियादी ढांचा (Infrastructure)
- भारत (India): एआई टैलेंट, स्किल पेनेट्रेशन, और ओपन डेटासेट्स
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अमेरिका (The Innovation King)
अमेरिका फिलहाल एआई का निर्विवाद लीडर है. उसकी सबसे बड़ी ताकत निजी निवेश (Private Investment) है. अमेरिका में एआई पर होने वाला खर्च चीन के मुकाबले 12 गुना ज्यादा है. दुनिया के आधे से ज्यादा हाई-एंड एआई सुपरकंप्यूटर्स अमेरिका में ही हैं.
चीन (The Execution Giant)
चीन ने रिसर्च वॉल्यूम और पेटेंट्स के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है. चीन की रणनीति मास डिप्लॉयमेंट की है. वे एआई को अपनी मैन्युफैक्चरिंग और निगरानी प्रणाली में सबसे तेजी से लागू कर रहे हैं. हालांकि, चिप प्रतिबंधों (Chip Bans) के कारण वे हार्डवेयर में पीछे रह गए हैं.
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भारत (The Talent Capital)
भारत ने साल 2024 से 2026 के बीच लंबी छलांग लगाई है (7वीं रैंक से 3वीं पर). भारत AI Skills Penetration और AI Hiring में दुनिया में पहले स्थान पर है. OpenAI के अनुसार, भारत ChatGPT का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मार्केट है (10 करोड़ साप्ताहिक यूजर्स). भारत अब दूसरों के मॉडल रेंट पर लेने के बजाय अपना Sovereign AI (जैसे भारत-GPT) और खुद का GPU क्लस्टर बना रहा है.
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चुनौतियां और भविष्य
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती Compute Gap (प्रोसेसिंग पावर की कमी) और Frontier Research में पीछे रहना है. जहां अमेरिका बड़े मॉडल्स बना रहा है, भारत Use-Case यानी एआई के जमीनी इस्तेमाल (खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा) में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है.
दुनिया के सबसे बड़े Global AI Vibrancy Index (Stanford HAI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, एआई की दौड़ अब बड़ी दो शक्तियों (US vs China) से आगे बढ़कर तीन दिग्गजों की रेस बन गई है.
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- अमेरिका (USA): हार्डवेयर, निवेश (109 अरब डॉलर) और फ्रंटियर मॉडल्स (जैसे o1, Llama 3.1)
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चीन (The Execution Giant)
चीन ने रिसर्च वॉल्यूम और पेटेंट्स के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है. चीन की रणनीति मास डिप्लॉयमेंट की है. वे एआई को अपनी मैन्युफैक्चरिंग और निगरानी प्रणाली में सबसे तेजी से लागू कर रहे हैं. हालांकि, चिप प्रतिबंधों (Chip Bans) के कारण वे हार्डवेयर में पीछे रह गए हैं.
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