ट्रैफिक चालान कटने के बाद कई लोग इसे तुरंत भरने की बजाय यह सोचकर छोड़ देते हैं कि बाद में भुगतान कर देंगे. लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर परेशानी बढ़ा सकती है. चालान समय बीतने के साथ अपने आप खत्म नहीं होता. लंबित चालान के कारण कोर्ट की कार्रवाई शुरू हो सकती है और कुछ मामलों वाहन के दस्तावेजों से जुड़ी दिक्कत भी सामने आ सकती है. इसलिए चालान को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते उसकी स्थिति जांचना और उसका निपटारा करना बेहतर है.

चालान नहीं भरने पर क्या होता है?

ई-चालान कटने के बाद वह आपके वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज रहता है. यह अपने आप खत्म नहीं होता. कुछ राज्यों और कुछ तरह के ट्रैफिक उल्लंघन में देर से भुगतान करने पर एक्स्ट्रा जुर्माना भी लग सकता है. लंबित चालान की जानकारी वाहन का रिकॉर्ड चेक करने पर दिखाई दे सकती है.

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चालान कोर्ट तक कैसे पहुंचता है?

ज्यादातर ई-चालान के भुगतान के लिए तय समय दिया जाता है. अगर इस लिमिट में चालान का भुगतान नहीं किया जाता है तो कुछ मामलों में ट्रैफिक विभाग इसे ट्रैफिक मजिस्ट्रेट की अदालत में भेज सकता है. इसके बाद मामला सिर्फ बकाया जुर्माने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बन जाता है.

कोर्ट से मिल सकती है सुनवाई की सूचना

चालान कोर्ट में जाने के बाद संबंधित व्यक्ति को सुनवाई की जानकारी दी जा सकती है. यह सूचना आरटीओ में दर्ज मोबाइल नंबर पर भेजी जा सकती है. अगर मोबाइल नंबर पुराना है या भेजी गई सूचना पर ध्यान नहीं दिया गया, तो सुनवाई की तारीख निकल जाने का खतरा भी रहता है. इसलिए वाहन से जुड़े रिकॉर्ड में मोबाइल नंबर अपडेट रखना जरूरी है.

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कोर्ट की सुनवाई में नहीं पहुंचे तो क्या होगा?

अगर वाहन मालिक कोर्ट की सुनवाई में नहीं पहुंचता और न ही स्थगन की मांग करता है या किसी प्रतिनिधि के जरिए पेश होता है तो मजिस्ट्रेट उसकी गैरमौजूदगी में मामले पर फैसला कर सकता है. इसे एक्स पार्टी कार्रवाई कहा जाता है.इसके बाद अदालत की ओर से समन भी जारी किया जा सकता है, जिसमें संबंधित व्यक्ति को अदालत में पेश होने का निर्देश होता है.

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लाइसेंस और RC पर भी पड़ सकता है असर

अगर कोर्ट की प्रक्रिया के बाद भी चालान का निपटारा नहीं होता है तो वाहन को वाहन डेटाबेस में फ्लैग किया जा सकता है. इससे रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट यानी RC के नवीनीकरण के समय परेशानी आ सकती है. वहीं खतरनाक ड्राइविंग, बहुत ज्यादा तेज रफ्तार या नशे में वाहन चलाने जैसे गंभीर मामलों में अदालत लाइसेंस को निलंबित या रद्द करने की सिफारिश भी कर सकती है.हालांकि, अलग-अलग राज्यों में नियमों को लागू करने का तरीका अलग हो सकता है.

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बीमा पर भी हो सकता है असर

कुछ मामलों में बीमा कंपनियां पॉलिसी रिन्यू कराते समय वाहन से जुड़ी जानकारी और लंबित चालान की स्थिति देख सकती है. लंबित जुर्मानों का बड़ा रिकॉर्ड कुछ परिस्थितियों में नो-क्लेम बोनस के आकलन या बीमा पॉलिसी की शर्तों को प्रभावित कर सकता है. इसलिए वाहन का चालान रिकॉर्ड साफ रखना बेहतर रहता है.

कार बेचते समय भी आ सकती है परेशानी

अगर आप अपनी कार बेचने की तैयारी कर रहे हैं और उस पर चालान लंबित है तो खरीदार या वाहन की जांच करने वाला प्लेटफॉर्म इसकी जानकारी देख सकता है. बकाया जुर्माने की वजह से खरीदार कार की कीमत कम करने क कोशिश कर सकता है. 

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बकाया चालान कैसे चेक करें?

अगर आपको लगता है कि आपके वाहन पर कोई पुराना चालान बाकी हो सकता है तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय सबसे पहले उसकी स्थिति जांचें. ऑनलाइन उपलब्ध चालान की जानकारी देखकर पता किया जा सकता है कि कितने चालान लंबित हैं और उसका स्टेटस क्या है.

कोर्ट वाले चालान का क्या करें?

अगर चालान कोर्ट में लंबित है तो उसे सामान्य ऑनलाइन भुगतान की तरह निपटाया नहीं जा सकता. ऐसे मामले में अदालत की प्रक्रिया का पालन करना पड़ सकता है. जहां सुविधा उपलब्ध हो वहां वर्चुअल कोर्ट के माध्यम से भी प्रक्रिया पूरी की जा सकती है. इसलिए कोर्ट में भेजे गए चालान को अलग से चेक करना जरूरी है.

चालान को टालना नहीं है समझदारी

लंबित चालान को जितने लंबे समय तक टाला जाेगा, उसे निपटाने के आसान ऑप्शन उतने ही लिमिटेड हो सकते हैं. इसलिए चालान का मैसेज आने के बाद उसे नजरअंदाज करने के बजाय समय पर स्टेटस चेक करें और जहां संभव हो, भुगतान कर दें.

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